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''आत्म प्रशंसा से कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम अपनी जिम्मेदारी को समझे।''- डॉ. अनुजा भट्ट

सलूम्बर में हुए आयोजन की उदघाटन रिपोर्ट

सलूम्बर:-5 दिवसीय लेखन कार्यशाला का समापन

‘‘बालिकाओं ने बनाया दीवार अखबार ’’

‘‘बच्चों में साहित्य सृजन की अपार संभावनाएं है......’’

‘‘पंखों में आकाश समेटे चले हमारा काफिला......’’

सलूम्बर में बच्चों की 5 दिवसीय लेखन कार्यशाला का उद्घाटन

' कैम्पस में कविता-१४' का आयोजन Vaya 'लिखावट'

''विष्णु प्रभाकर रचना और कर्म दोनो में गांधी कें बहुत करीब थे।''-राधा भट्ट

''पत्रिकाएं व अखबार कमोवेश कारपोरेट जगत व साम्रज्यवादी ताकतों के प्रभाव में हैं ''-अशोक नारायण भचार्य