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बुधवार, अक्तूबर 10, 2012

‘‘बच्चों में साहित्य सृजन की अपार संभावनाएं है......’’


सलूम्बर, 

‘‘बच्चों में साहित्य सृजन की अपार संभावनाएं है। अगर अवसर मिले तो वे अपनी प्रतिभा को उजागर कर सकते है। उनके पास न शब्दों की कमी है न पर्याय या तुको की, वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। जोधनिवास के सभागर में चल रही सर्वशिक्षा अभियान एवं साहित्यिक संस्था सलिला द्वारा आयोजित पांच दिवसीय लेखन कार्यशाला के तीसरे दिन बच्चों को राजस्थानी भाषा में रचना प्रक्रिया का शिक्षण देने आये प्रख्यात विद्वान डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ ने कही। अपने बाल साहित्य सर्जक के रूप में साक्षात करवाते हुए बालिकाओं को राजस्थानी गीतों, लोरियों और खेल-गीतो का रसस्वादन करवाया। कविता कहानी के टिप्स दिए।

कार्यक्रम का ए.डी.जे. राजश्वरसिंह ने कार्याशाला निरीक्षण किया एवं बालिकाओं को संबाधित करते हुए कहा कि वर्तमान प्रतियोगिता के युग में बच्चों को रटने रटाने की संस्कृति के बजाय रचनात्मक कार्यो के लिए अग्रसर करने की आवश्यकता है। सर्वशिक्षा अभियान जैसी कई सरकारी योजनाएं है जिन्हें वास्तविक रूप में बच्चों से जोड़ने की आवश्यकता है।

इस दिन संयोजक उदय किरौला ने कहानी लेखन और मातृभाषा के महत्व को रेखाकिंत करते हुए कई उदाहरणों से बच्चों की प्रतिभा को निरूपित किया। वरिष्ठ लेखक नंदलाल परसारामाणी ने कहानी के सुखांत-दुखांत पक्षों का उल्लेख कर बच्चों से भारतीय परम्परानुसार सुखान्त कहानिया सृजित करने को कहा। पूंजीलाल वरनोती ने राष्ट्रभक्ति के गीतों का गायन करवाया। मुकेश राव ने प्रेरक प्रसंग सुनाये। डॉ. विमला भंडारी  ने बालोपयोगी कहानियों की रूपरेखा बताई।कार्यशाला में मधु माहेश्वरी, दिनेश जैन, स्नेहलता भंडारी, चन्द्रप्रकाश मंत्री, कौशल्या सोलंकी, उषा कचौरिया, शशीलता जैन आदि उपस्थित थे।

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