नवउदारवादी व्यवस्था ने भूमि सुधार की अवधारणा को ही नष्ट कर दिया on May 19, 2012 कुमार कृष्णन नई दिली समाज +
''जन्म और शिक्षा की भाषा अलग होने से सीखने की निरंतरता पर आघात पहुँचता है। ''-गिरीश उपाध्याय on May 16, 2012 भोपाल मीडिया समाज +
वास्तविकता यह है कि पूँजी अपने अवरोध के सारे बंधनों को तोड़ती है। on April 24, 2012 कौशल किशोर लखनऊ समाज +