Posts

Featured

नवउदारवादी व्यवस्था ने भूमि सुधार की अवधारणा को ही नष्ट कर दिया

''जन्म और शिक्षा की भाषा अलग होने से सीखने की निरंतरता पर आघात पहुँचता है। ''-गिरीश उपाध्याय

अशोक जमनानी को माधव ज्योति अलंकरण

मुंगेर:नक्सलियों के समर्पण के मायने

काम से ही आदमी की पहचान होती है-मीठू लाल जाट

वास्तविकता यह है कि पूँजी अपने अवरोध के सारे बंधनों को तोड़ती है।

भारत में स्वैच्छिकता का इतिहास बहुत पुराना है।

मूल्यों के प्रति समर्पित थे लाला जगत ज्योति प्रसाद

चावल के उन्नत बीजों का प्रयोग एक बड़ा विकल्प है।