मंजुल भारद्वाज का थिएटर ऑफ रेलेवेन्स समाज की खोयी आवाज़ को लौटाता है-कुमार प्रशांत on May 07, 2012 मुम्बई लोकार्पण साहित्य +
'' पुस्तक/रचना जिसमें दम नहीं होगा वह इतिहास में चली जाएगी।''-नामवर सिंह on February 24, 2012 अखिलेश मिश्र उद्भ्रांत नई दिल्ली नामवर सिंह लोकार्पण साहित्य +