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जनपक्षधर प्रकाशन का वैकल्पिक केंद्र 'दख़ल प्रकाशन'

अशोक कुमार पाण्डेय का फेस बुक स्टेटस: आखिर हम क्यों इतने आत्मकेंद्रित हो गए हैं

''साहित्य उस वक़्त रौशनी देता है जब राजनीति में अंधियारा छाया होता है''-डा के बी एल पाण्डेय

'' कोई चीज राजनीति से परे नहीं होती, निष्पक्षता का भी अपना पक्ष होता है'' -अशोक कुमार पाण्डेय

ग्वालियर दख़ल विचार मंच का आयोजन:'साहित्य और समाज बरास्ता प्रेमचंद '

लेखकों का संयुक्त बयान:ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में हमारी सामूहिक कार्यवाही