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स्वयं प्रकाश जी और समकालीन कथा साहित्य के बारे में डॉ माधव हाड़ा की टिप्पणी

डॉ सदाशिव श्रोत्रिय के संस्मरणों में स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश जी की कहानी 'कानदाँव'