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गुरुवार, अगस्त 15, 2013

''वे हमारे देश में खाताबाही लेकर आये थे होंठों पर उनकी कुटील हंसी थी''-प्रो. नन्द चतुर्वेदी

उदयपुर 14 अगस्त। 

‘‘यह हमारा दिन है पराधीनता से मुक्ति का वे हमारे देश में खाताबाही लेकर आये थे होंठों पर उनकी कुटील हंसी थी’’ सुनाकर हिन्दी साहित्य के मानद हस्ताक्षर प्रो. नन्द चतुर्वेदी ने भरपूर दाद पाई। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सद्भावना कवि गोष्ठी राजस्थान साहित्य अकादमी, प्रसंग संस्थान एवं डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में विद्याभवन ऑडिटोरियम में किया गया। सद्भावना गोष्ठी में प्रतिभागी कवियों ने स्वतंत्रता दिवस पर हिन्दी, राजस्थानी व उर्दू में राष्ट्रीय एकता, स्वाधीनता और सद्भावना से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया। 

सरस्वती वंदना के साथ प्रारम्भ कवि सम्मेलन में डॉ. गोपाल बुनकर ने ‘कहते हैं सबसे अहले वतन दिलो जान से है पहले मेरा वतन’ सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर किया। डॉ. तसनीम खानम ने उर्दू में नज्म प्रस्तुत करते हुए ‘गोर से देखा तो वो गांधी था जिसकी याद में रोते हैं गंगा और जमन’ सुनाकर भरपूर दाद पाई। राजस्थानी के वरिष्ठ कवि उपेन्द्र अणु ने ‘‘या माटी राजस्थानी है इण कोखरी जन्मी मीरा’’  सुनाकर श्रोताओं को झकझोर दिया। डॉ. मधु अग्रवाल ने ‘‘हम परिंदे हैं इंसान नहीं’’ सुनाया। इकबाल हुसैन ‘इकबाल’ ने ‘‘खूदा सितारों से बुलन्दी न दे जमीं पे रहने का सलीका के दे’’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को वाह कहने को मजबूर कर दिया। राजस्थानी कवि श्रेणीदान चारण ने तरन्नुम में सत्य केवल सारथी रथ को बढ़ाकर देखिए, मिट जायेंगे दुश्मन सभी सर को कटा कर देखिए’’ सुनाया। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. प्रभा वाजपेयी ने ‘‘सहो उनके लिए सहो, जो नहीं थे उनके लिए, नहीं चाहते तुम कि मौसम इसलिए मुस्कराये’’ सुनाकर कवि गोष्ठी को परवान चढ़ाया। शायर शाहिद अजीज ने ‘‘इधर उधर की अखबारों से कितनी खबरें चुराकर’’ सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया। प्रसिद्ध लोकलाविद् डॉ. महेन्द्र भाणावत ने ‘‘तुम कहां जाओगे रोने वहां तो शमशान भी नहीं कब्रगाह भी नहीं और उसने देहदान भी कर दी है’’ सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। 

राजस्थान साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष व शायर आदिब अदीब ने ‘‘यहां हिन्दू भी हैं यहां मुसलमान भी हैं ये वेतन मेरा वेतन है’’ सुनाकर श्रोताओं को आल्हादित कर दिया। केन्द्रीय साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत कवि डॉ. ‘ज्योतिपुंज’ ने ‘‘वाह रे प्रताप सिंह धन्य तारी वीरता ने’’ सुनाकर कवि सम्मेलन को नयी ऊँचाइयां दी। डॉ. भगवतीलाल व्यास ने ‘‘अब हर खुशी का विवाह नहीं होता अब हर विवाह का निभाह नहीं होता, पहले मौत से बड़ी सजा नहीं होती, अब जिन्दगी जीने की सजा बड़ी होती है’’ सुनाकर भरपूर दाद पाई। सुप्रसिद्ध गीतकार किशन दाधीच ने ‘‘ईक जुलाहा गा रहा है चरखियों की चाल पर चरखियों की चाल जैसी जिन्दगी है आजकल’’ प्रस्तुत कर ऑडिटोरियम को तालियों से गुंजा दिया। कवि गोष्ठी का संचालन करते हुए डॉ. इन्द्रप्रकाश श्रीमाली ने ‘‘आओ मित्रों हर्ष मनाए, आजादी का पर्व है वन्दन करें हम उन वीरों का जिन पर हमको गर्व है’’ सुनाकर कवि गोष्ठी को गहराई प्रदान की। 

प्रारम्भ में ट्रस्ट सचिव नंदकिशोर शर्मा ने स्वागत किया। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता आबिद अदीब ने की तथा मुख्य अतिथि रियाज तहसीन, अध्यक्ष विद्याभावन एवं विजय एस. मेहता, अध्यक्ष डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट थे। धन्यवाद ज्ञापन राजस्थान साहित्य अकादमी के प्रतिनिधि रामदयाल मेहर ने किया। कवि गोष्ठी में शहर के बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ साहित्यकारों एवं शिक्षाशस्त्रियों ने भाग लिया।

  डॉ. इन्द्रप्रकाश श्रीमाली           नंदकिशोर शर्मा
 अध्यक्ष, प्रसंग संस्थान, उदयपुर सचिव, डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट, उदयपुर 

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