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गुरुवार, अप्रैल 25, 2013

व्यक्ति अपूर्ण हो सकता है, लेकिन उसके द्वारा रचित कविता पूर्ण होती है।-डॉ. सदाशिव श्रोत्रिय


प्रो0 नंद चतुर्वेदी शुभकामना गोष्ठी

उदयपुर/22 अप्रैल - 

राजस्थान साहित्य अकादमी में प्रदेश के प्रख्यात वरिष्ठ कवि साहित्यकार प्रो. नंद चतुर्वेदी के 91 वें जन्म दिवस के शुभ अवसर पर शुभकामना गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ मां सरस्वती को माल्यार्पण व दीप प्रजज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी के अवसर पर प्रदेश व शहर के साहित्यकारों द्वारा प्रो. नंद चतुर्वेदी को माल्यार्पण कर शुभकामनाएं व बधाई दी। इस अवसर पर शहर की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा भी नंद चतुर्वेदी का माल्यार्पण कर उनके दीर्घायु होने की कामना की ।

            अकादमी अध्यक्ष  वेद व्यास ने नंद चतुर्वेदी को जन्म दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने समय की परिक्रमा से जो लड़ाई लड़ी है, वह उल्लेखनीय है। नंद चतुर्वेदी सामाजिक सरोकारों के कवि है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नंद चतुर्वेदी का कोई विकल्प नहीं है। श्री व्यास ने राजस्थान के साहित्यकार के उपेक्षित होने पर चिन्ता व्यक्त की तथा अकादमी को सामाजिक सरोकारों की संस्था के रूप में प्रदेश में स्थापित करने का संकल्प किया। 

            अपने 91 वें जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में विचार प्रकट करते हुए प्रो0 नंद चतुर्वेदी ने कहा कि कवि के पास अपने प्रज्वलन के सिवाय कुछ नहीं है, एक भट्टी है जिसमें वह निरन्तर दहन करता रहता है। जिसमें प्रश्नों का उत्तर ढूंढ़ता है। राजस्थान का रचनाकार कविता के साथ साथ गद्य लेखन भी करें , क्योंकि गद्य जनता के नजदीक जाएगा और जनता की समस्याओं को समझेगा और कवि उसे कविता के माध्यम से प्रस्तुत करता है। रचनाकार छोटी-मोटी डायरी, लघु कथा लिखें। क्योंकि गद्य ही कवि को बचाता है। हम जनता विहीन भाषा की कल्पना नहीं कर सकते। जनता का मन जानने के लिए उनके बीच अपनी पहचान बनाने के लिए गद्य भी लिखना चाहिए। साहित्य की यात्रा अनवरत है साहित्यकार अपनी प्रज्वलित आत्मा को साहित्य के लिए समर्पित करे।

            गोष्ठी में प्रो. के.के. शर्मा ने शुभकामना गोष्ठी के सम्बन्ध में कहा कि अकादमी द्वारा हृदय से साहित्यकार का सम्मान करना ही साहित्य और साहित्यकार का सम्मान है। नाथद्वारा से इस अवसर पर कार्यक्रम में भागीदारी करने पधारे साहित्यकार डॉ. सदाशिव श्रोत्रिय ने प्रो. नंद चतुर्वेदी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति अपूर्ण हो सकता है, लेकिन उसके द्वारा रचित कविता पूर्ण होती है। नंद बाबू की कविताएं दिल तक पहुंचती हैं। जब तक कविताएं पाठक के मन में नहीं उतरती तब तक कविता का आनन्द नहीं लिया जा सकता है। जिन कविताओं की प्रक्रिया अच्छी होती है, वे दिल को छू लेती हैं। राजस्थान के कवियों में नंद बाबू एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। जब तक कवि में प्रेरण के क्षण नहीं होंगे, तब तक वह उस प्रकार की कविताएं नहीं लिख सकता। श्रोत्रिय ने इस अवसर पर नंद चतुर्वेदी की कविता ‘ जो न चिड़िया है, न तितली ’ का वाचन भी किया। प्रख्यात लोक कलाविद् डॉ. महेन्द्र भाणावत ने श्री नंद चतुर्वेदी के साथ बिताए हुए क्षणों को श्रोताओं के साथ साझा किया तथा उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके शतायु होने की कामना की। डॉ. भगवतीलाल व्यास ने नंद बाबू को खरी-खरी कहने वाला कवि बताया तथा उनके पारिवारिक रिश्तों व हिन्दी में उनके महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान की जानकारी दी। अकादमी के उपाध्यक्ष श्री आबिद अदीब ने प्रो. नंद चतुर्वेदी के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए श्री चतुर्वेदी के आजादी के समय के साहित्यिक योगदान व आन्दोलनों में किए गए महत्वपूर्ण भागीदारी से अवगत कराया। साथ ही श्री चतुर्वेदी के अकादमी सरस्वती सभा व संचालिका के सदस्य रहते हुए साहित्य अकादमी में दिए गए मार्गदर्शन की जानकारी भी दी।

            इस अवसर पर श्री नन्द बाबू के सान्निध्य तथा पं. विश्वेश्वर शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित काव्य गोष्ठी में सर्वश्री डॉ.रजनी कुलश्रेष्ठ, डॉ. ज्योतिपुंज, डॉ. मंजु चतर्वेदी, मुश्ताक चंचल, लक्ष्मणपुरी गोस्वामी, भवानीशंकर गौड़, डॉ. ए.एल. दमामी, आबिद अदीब, किशन दाधीच, भगवतीलाल व्यास ने काव्य-पाठ कर श्री चतुर्वेदी को शतायु होने की शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का संचालन श्री किशन दाधीच ने किया तथा काव्य गोष्ठी का संचालन अकादमी सचिव डॉ. प्रमोद भट्ट ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।


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