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शनिवार, सितंबर 15, 2012

नेशनल प्लान फोर कन्जर्वेशन ऑफ एक्विटीक इको सिस्टम Vaya उदयपुर


उदयपुर
14 सितम्बर। झीलों के संरक्षण की राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना का नाम (एन. एल. सी. पी.) बदल कर अब नेशनल प्लान फोर कन्जर्वेशन ऑफ एक्विटीक इको सिस्टम (राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी संरक्षण योजना) होगा। यह जानकारी राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना की परियोजना निदेशक डा. आर. दलवानी ने विगत सप्ताह मुम्बई में आयोजित झील संरक्षण विषयक अन्तर्राष्ट्रीय बैठक में इन्टरनेशनल लेक एनवायरमेन्ट कमेटी फाउण्डेशन, जापान के अध्यक्ष डा. मासाहिसा नाकामूरा, टेक्सास विश्वविद्यालय, अमेरिका के डा. वाल्टर रस्ट, नीरी, नागपुर के निदेशक डा. राकेश कुमार, चिलिका लेक डवलपमेन्ट अथॉरिटी के निदेशक डा. अजित पटनायक, पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व निदेशक डा. ई. वी. मूले ने शिरकत की। उदयपुर से झील संरक्षण समिति के डा. तेज राजदान एवं िवद्या भवन पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्राचार्य अनिल मेहता ने भाग लिया।

शुक्रवार को डा. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट में झीलें एवं नागरिकता विषयक संवाद में मुम्बई बैठक व कॉन्फ्रेस की जानकारी देते हुए डा. तेज राजदान व अनिल मेहता ने बताया कि राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना तथा राष्ट्रीय वेटलेण्ट संरक्षण योजना को नवीन राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी योजना में समाहित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि झील संरक्षण समिति व उदयपुर के झील प्रेमी विगत लम्बे समय से यह आग्रह करते रहे है कि एन. एल. सी. पी. में केवल सौन्दर्य वृद्धि व सड़क निर्माण इत्यादि पर ही ध्यान नहीं देते हुए झीलों के जल की गुणवत्ता बढ़ाने व झील इको सिस्टम को सुधारने पर जोर दिया जाए। नवीन नाम से संभवतया इस दिशा में अधिक प्रयास होंगे। मेहता तथा राजदान ने बताया कि बैठक में पर्यावरण मंत्रालय सहित अन्य एंजेसीयों ने इस बात पर चिंता जताई कि झीलों के वैज्ञानिक सीमांकन के मामले में राज्य सरकारें गंभीर नहीं है। सी. टी. लेवल मानीटंरींग कमेटी में एन. जी. ओ. को दूर रखा जा रहा है तथा झील विकास प्राधिकरण बनाने पर ग्रभीर प्रयास नहीं हो रहे है। मुम्बई बैठक में डा. दलवानी ने स्पष्ट कहा कि केचमेंट एरिया तथा सीवरेज निस्तारण पर गंभीर प्रयास व कार्यक्रम नहीं हुए है।झील विकास प्राधिकरण के ड्राफ्ट पर होगी चर्चा:- ट्रस्ट में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यद्यपि नागरिकों को सरकार के स्तर पर तैयार झील विकास प्राधिकरण के ड्राफ्ट की प्रतिलिपि मुहैया नहीं करवाई गई है तथापि संस्थाएँ प्रतिलिपि प्राप्त कर नागरिक सुझाव प्रस्तुत करेगी। उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण का मूल प्रस्ताव झील संरक्षण समिति द्वारा तैयार किया गया था।

बहाव क्षैत्र व झीलों में हुए अवैध कब्जे तोड़े जाये:- बैठक में राज्य हाईकोर्ट, जयपुर द्वारा विगत दिनों दिये गये निर्देशों की अनुपालना में मांग की गई अमीनाशाह नाले, जयपुर में लिये गये निर्णयों की तरह उदयपुर में अवैध अतिक्रमण हटाएं जाये।

झीलों की सफाई की जिम्मेदारी नगर परिषद पर:- बैठक में इस बात पर दुःख व्यक्त किया गया कि नगर परिषद झीलों की सफाई के कार्य से मुंह मोड़ रही ।तेज शंकर पालीवाल व भंवर सिंह राजावत ने कहा कि झीलों के भरने के साथ ही सारे सीवर टेंक भरे हुये है। इससे प्रमाणित होता है कि झीलों का पानी सीवर के बहार जा रहा है। इस्माईल अलि दुर्गा ने कहा कि केवल व्यावसायिक लाभ वाली मछलिया को नही डालते हुए ऐसी मछलिया के बीज डालने होग जो  झील के पारिस्तिक तन्त्र को सुधार होगा।

महेश गढवाल एंव बी एल कुकडा ने कहा कि जनता झीलों व नालो  पर बैठती व गुजरती है वहा पर झालिया लगनी चाहिए ताकि झीलों व नालो  को कचरा पात्र बनने से रोका जा सके। हाजी सरदार मोहम्मद एव शान्ति लाल भण्डारी ने कहा कि गंदगी व कचरा फेकने वालो को टोकना होगा। 

अध्यक्षीय उदबोधन में यु. आई. टी के पुर्व ट्रस्टी चन्द्र गुप्ता चौहन ने कहा कि एन. एल. सी. पी मे वे ही कार्य हो रहे है जो पुर्व मे नगर परिषद व प्रन्यास करते थे। झीलों के सदर्ग मे पानी  व पानी के अन्दर एक्वेटिक सिस्टम को बेहतर करना होगा। ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने कहा कि स्वैच्विक भावना एंव  नागरिक जिम्मेदारी के अभाव मे झीलों का सतत विकास सम्भव नही है।बैठक में नुर मोहम्मद, ए. आर खान, जमना लाल दशोरा, एन. एन. खमेसरा, सुशील कुमार दशोरा, के एल बाफना, लीला कुमावत सहित गणमान्यो ने संवाद मे भाग लिया।,

अनिल मेहता                                           नितेश सिह
9414168945                                          9983936677

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