आबू रोड़ अधिवेशन की सफलता - Apni Maati: News Portal

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गुरुवार, जुलाई 26, 2012

आबू रोड़ अधिवेशन की सफलता

अनुभव:
स्पिक मैके राजस्थान के साउथ जोन का स्टेट कन्वेशन आबू रोड़ स्थित ब्रह्मकुमारी के आश्रम में जुलाई  माह की इक्कीस और बाईस जुलाई को संपन्न हुआ। किसी को माउंट आबू की आबो-हवा यहाँ तक खींच लाई तो किसी को बड़े और नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां खींच लाई। आन्दोलन के संस्थापक डॉ.किरण सेठ के मुख्य सानिध्य में ही शुरू हुए इस आयोजन के बहुत से मायनों में सफल कहा जाना चाहिए। एक तो लगभग दो सौ प्रतिभागियों की संख्या अब तक हुए आयोजनों में लगभग सबसे ज्यादा रही है। औपचारिक उदघाटन के बाद हुए परिचय सत्र से ही साफ़ ज़ाहिर हो गया कि यहाँ कोटा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर, सिरोही, जालोर, जोधपुर, बाड़मेर, नाथद्वारा, हनुमानगढ़ से पुराने कार्यकर्ताओं के साथ बहुत से नए साथी भी जुड़ने आये।ख़ास बात ये भी दर्ज की जाए कि इस अधिवेशन में आये बच्चों को केंद्रित कर एक गायन और एक व्यक्तित्व निर्माण की कार्यशाला भी आयोजित की गयी।

आयोजन से जुड़े अशोक जैन, आदित्य गुप्ता, प्रसन्न माहेश्वरी और डॉ. माधव हाड़ा जैसे साथियों के हुयी बातचीत में मैं समझ पाया कि हमें स्पिक मैके में अभी बहुत संभल कर आगे बढ़ना होगा। लगातार हो रहे इस विस्तार में भी हमारे इथिक्स को किसी भी हद तक अपने हाथों में ढ़ाबे रखना होगा। दो दिनी आयोजन में पंडित शिव कुमार शर्मा का आलाप के ज़रिये उपस्थित जनों में ध्यान करने का एक अंदाज़ दिखाना बहुत भाया। वहीं विदुषी और बहुत मेहनती नृत्यांगना रमा वैध्यनाथन की भरपूर प्रस्तुति से भरतनाट्यम की नयी परिभाषाएं दर्शकों को समझ आयी। पल्लवी और अर्ध नारीश्वर की उनकी प्रस्तुति सबसे ज्यादा प्रभावकारी रही। आपसी चर्चा के नाम पर भले हम कुछ कम चर्चा कर पाए मगर फिर भी आगामी समय में अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने  के लिहाज़ से हम सभी खुद में पर्याप्त रूप से जोश भरकर वहाँ से लौटे। आते ही जोधपुर के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में ईरा सिसोदिया और देवेश के नेतृत्व में वर्कशॉप-डेमोस्ट्रेशन मोड्यूल पर काम शुरू हो गया। यही काम हनुमानगढ़ और कोटा,बूंदी में और तेज़ी से चल पड़ा

दुसरे दिन भी रणिता  डे  के गायन ने बहुत अभिभूत किया इतनी कम उम्र में बहुत उम्दा गायकी की मिशाल देती इस कलाकारा की गायकी के इस कार्यक्रम में ठुमरी ने तो हमें परवान तक चढ़ाया। हालांकि पंडित विश्व मोहन भट्ट का वादन मैं नहीं सुन सका। बाकी अधिवेशनों की तरह भोजन-आवास की सुविधाएं भी बेहतर थी। अधिवेशन के अधिकाँश प्रतिभागियों ने मांउट आबू घूम कर प्रकृति के नज़दीक रहते कुछ समय भी बिताया। दिल्ली  से आये दल में राष्ट्रीय कोषाधिकारी रिक्की श्रीवास्तव, संगीता जैन,हर्ष नारायण  महाकर मैडम,अभिनव कृष्णा शामिल थे। हम सभी के कानों में एक बार फिर आचार्य किरण सेठ की बातें गहरे तक हल्ला करती सुनाई देती रही। बहुत बारीक बातों पर ध्यान देने की कला के बहुत से नुस्खे हमने किरण जी से पाए हैं। खासकर पहले दिन की दोपहर हुए कोलेज और स्कूल  के बच्चों से सवाल-ज़वाब का सत्र बहुत यादगार रहा।



माणिक




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