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रविवार, जुलाई 01, 2012

रात में घर जला कर पडौसी मेरा,मुस्कराता रहा सोचते सोचते


मैरी पगड़ी तु क्या उछालेगा 
काट लूंगा मैं अपना सर पहले ।। 
उदयपुर 30 जून, 2012 
‘‘उसने दी बद्दुआयें सभी को मगर, दी मुझी को दुआ  सोचते सोचते  ’’ रात में घर जला कर पडौसी मेरा, मुस्कराता रहा सोचते सोचते ’’ से प्रसिद्ध शायर महेशर अफगानी ने डॉ. मोहन सिंह  मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित मुशायरे का आगाज किया। शायर मेहसर अफगानी ने वाह ! वाह ! की आवाजों के मध्य नज्म’’ मैं देशिहत से कुछ बोल नहीं पाया, वो मेरी खामोशी केा तस्कीन समझ बैठे पेश कर भरपूर दाद बटोरी। 

मुशायरे की सदारत करते हुये नामचीन शायर प्रेम भंडारी ने ‘‘मेरी पगड़ी तु क्या उछालेगा, कर लूंगा मैं अपना सर पहले’’ सुना कर भरपुर तालीया बटोरी, डॉ. भण्डारी ने महाराणा प्रताप पर लिखी अपनी नज्म ‘‘याद आयेगा छोड के जाने वाला, बात खुद्दारी की दुनिया को सिखाने वाला’’ सूना कर हाल को गुंजायमान कर दिया। हाजरीन की फरमाईश पर डॉ. भण्डारी ने ‘‘आईये बैठीये आमने सामने’’ सूना कर भरपुर दाद बटोरी। 

शायरा शकुन्तला सरूपरिया ने तरन्नूम मैं ‘‘झूठ बोले फिर भी देखो, सबने दी इज्जत उन्हें, बोला सच तो झिडकिया कितनी आने लगी सूना कर खूब वाह-वाही बटोरी। शायर ईकबाल हुसैन ईकबाल ने ‘‘शोहरते उससे बढक क्या होगी, जिक्र हो उसी का और वो यहा नहीं  पेश कर श्रोताओं को आह भरने को मजबूर कर दिया। ईकबाल ने तरन्नमू मैं ‘‘दिखा तो रहे हो हमें आसमाँ तुम, जरा तुम हमारे कटे पर तो देखो’’ सूना कर खूब दाद पायी। 

शायर डॉ. ईशहाक ने ‘‘वक्त के धारे में जो बहता नही, साथ उसका वक्त भी देता नहीं’’ सूना कर बहुत दाद पायी। डॉ. राजगोपाल की नज्म ‘‘छूकर मन एक लम्हा गुजरा’’ को श्रोताओं ने बहुत पसन्द किया। शायर फारूक बिकानेरी ने उदयपुर शहर पर बनायी अपनी नज्म ‘‘नगरी ये झीलों ने उदयपुर शहर पर बनायी अपनी नज्म ‘‘नगरी ये झीलों की उदयपुर है, हर जगह यहां कूदरती नूर है, पेश कर भरपूर शाबाशी बटोरी। मुशायरे का संचालन करते हुये मशहूर शायर मुश्ताक चंचल ने ‘‘कौन चक्कर में पड़े, हमें क्या ? आज देश के जो हालात है ये हमें क्या का ही कमाल है ?’’ सूना कर श्रोताओं को आल्हादित कर दिया। मुशायरे के प्रारंभ में ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने शायरों व अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद नितेशसिंह ने ज्ञापित किया। 

नन्दकिशोर शर्मा 
सचिव 

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