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सोमवार, अप्रैल 23, 2012

डा0 अमरेन्द्र ने भारतीय बोलियों तथा राष्ट्रभाषा के समन्वय को रेखांकित किया है।


मधुशाला का अंगिका में अनुवाद
 सम्मानित किये गए डॉ. अमरेन्द्र सहित्य साधना पर संगोष्ठी   

भागलपुर:
इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन एवं दिशा ग्रामीण विकास मंच के संयुक्त तत्वाधान में डा0 अमरेन्द्र की साहित्य साधना पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता सुप्रसिद्ध समाजसेवी गिरधर प्रसाद ने की। इस मौके पर उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।आरंभिक उद्बोधन में इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकुटधारी अग्रवाल ने कहा कि साहित्य रचना एक उद्यम है। इस लिहाज से यह फर्ज बनता है कि साहित्य सृजन से जुड़े लोगों को सम्मानित किया जाय। डा0 अमरेन्द्र ने हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला का अंगिका में अनुवाद कर ऐतिहासिक कार्य किया। 
कार्यक्रम के संचालन के क्रम में दिशा ग्रामीण विकास मंच के सचिव मनोज कुमार पाण्डेय ने उनके व्यक्तित्व के विभिन्न रूपों को रखा। डा0 अमरेन्द्र की साहित्य साधना पर प्रकाश डालते हुए सुंदरवती महिला महाविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डा0 विद्यारानी ने कहा कि इन्होंने भारतीय बोलियों तथा राष्ट्रभाषा के समन्वय को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि साहित्य की हर विधाओं पर काम किया। इनके लेखन में ठहराव नहीं है। आपने रचनाकर्म के माध्यम से हिन्दी के साथ-साथ अंगिका साहित्य को समृद्ध किया। वहीं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंगिका विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 मधुसूदन झा ने अंगिका आंदोलन का सर्जक कहा। उन्होंने कहा कि साहित्य की हर विधा पर काम किया। सभी रचनाएं यथार्थ बोध पर आधारित है। 

बहस को आगे बढ़ाते हुए तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी स्नात्कोत्तर विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध आलोचक डा0 नृपेन्द्र प्रसाद वर्मा ने कहा कि हिन्दी के लिये जो काम महावीर प्रसाद द्विवेदी तथा आचार्य शिवपूजन सहाय ने किया, वही काम अंगिका के लिये डा0 अमरेन्द्र ने किया है। उन्होंने अंगिका के साथ-साथ हिन्दी में भी साहित्य की रचना की। सूरज के पार और जनतंत्र की विक्रमशिला में यथार्थ का चित्रण है। उन्होंने कहा कि अंगिका में गेना की रचना सर्वहारा पात्र पर आधारित है। यदि यह रचना हिन्दी में की गयी होती तो हिंदी का यह चर्चित महाकाव्य होता। उन्होंने कहा कि डा0 अमरेन्द्र में नैसर्गिक प्रतिभा है। अपनी रचनाओं में सामाजिक कुरीतियों पर कुठाराघात किया है। रचनाओं में दूरगामी दृष्टि परिलक्षित होती है। विदेशों में जमा कालाधन आज एक मुद्दा है, जबकि अमरेन्द्र ने इसकी चर्चा 1981 में अपनी रचनाओं में कह डाली थी। राजनीतिक व्यवस्थाओं पर जमकर कुठाराघात किया है। उनकी स्वभाव में मानवीय मूल्य है। उनकी रचनाएं धूमिल और मुक्तिरोध के समकक्ष है।कार्यक्रम का आकर्षक पक्ष डा0 अमरेन्द्र का काव्यपाठ रहा। हरिवंश राय बच्चन की सुप्रसिद्ध कृति मधुशाला के अंगिका अनुवाद का पाठ किया। इस क्रम में उन्होंने कहा कि अंगिका में अनुवाद का मकसद आम लोगों तक उन्हें पहुंचाना है।

इस अवसर पर डा0 सामवे ने कहा कि हाल में हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला का संस्कृत में अनुवाद हुआ है। अंगिका में अनुवाद कर साहित्य को समृद्ध किया है। अंगिका को लेकर संघर्ष किया और विश्वविद्यालय के पाठ्य में शामिल कराने में अपनी अहम भूमिका अदा की। अपनी साहित्यिक क्षमता का उन्होंने भरपूर इस्तेमाल किया है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नात्कोत्तर हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डा0 बहादुर मिश्र ने कहा कि डा0 अमरेन्द्र ने एक साथ साहित्य की विधाओं को समेट कर रखा है। नये लोगों के प्रेरणा स्रोत हैं। वे अंगिका की मांग के सिंदूर हैं। अंगिका भाषा की जो वर्तनी तैयार की है, वह विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में स्वीकृत है। अंगिका महाकाव्य गेना की काव्यगत विशेषताओं की विस्तृत मीमांसा की। ऋतुरंग में प्रकृति चित्रण के बिम्ब का उल्लेख किया।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक, नवीन राय ने कहा कि नवोदित साहित्यकारों के प्रेरणास्रोत हैं। ”ठहरा हुआ समय” उनकी कृति उन्हीं की प्रेरणा का परिणाम है। अपनी रचनाओं के माध्यम से लोक साहित्य अंगिका को समृद्ध किया है। मंजूषा चित्रकला के संदर्भ में उनकी दृष्टि की चर्चा की। उनका सम्मान साहित्य का सम्मान है। हिन्दी और अंगिका के बीच समन्वय कायम करने वाले सेतू हैं। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ का चित्रण है। गहरे भावबोध और विशिष्ठ अनुभूतियों से लैश है।समारोह के विशिष्ठ अतिथि यूको बैंक के अंचल प्रबंधक आरती प्रसाद सिंह ने कहा कि डा0 अमरेन्द्र साहित्य चेतना के धनी हैं, तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम किये हैं। उनकी रचनाएं कालजयी हैं। अध्यक्षीय उद्गार व्यक्त करते हुए समाजसेवी गिरधर प्रसाद ने कहा कि मधुशाला डा0 हरिवंश राय बच्चन की कालजयी कृति है। अंगिका में जिस ढंग से डा0 अमरेन्द्र ने अनुवाद किया है, वह विशिष्ठ अंदाज और शैली में है।
धन्यवाद ज्ञापन इबिया के महासचिव प्रदीप झुनझुनवाला द्वारा किया गया। इस अवसर पर बनवारी लाल खेतान, विकास कु0 झा, डा0 प्रतिभा राजहंस, राजकुमार, महावीर सुगंध, सुनील अग्रवाल, शंकर लाल, सिद्धार्थ शंकर झा, अग्रणी जिला प्रबंधक दिलीप घोष, मधुलक्ष्मी, उलूपी झा, ग्राम दीदी की उषा सिन्हा, संगीता उपस्थित थी।


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

कुमार कृष्णन
स्वतंत्र पत्रकार
 द्वारा श्री आनंद, सहायक निदेशक,
 सूचना एवं जनसंपर्क विभाग झारखंड
 सूचना भवन , मेयर्स रोड, रांची
kkrishnanang@gmail.com 
मो - 09304706646
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