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गुरुवार, जनवरी 01, 2015

Writer Dr. Geetanjli Shree

डॉ. गीतांजलि श्री का जन्म १२ जून सन १९५७ को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी नामक एक छोटे शहर में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में हुई। उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात जवाहरलाल नेहरू विश्वविदयालय से इतिहास में स्नात्कोत्तर किया। उन्होंने सयाजी राव विश्वविद्यालय, वड़ोदरा सेप्रेमचंद और उत्तर भारत का औपनिवेशिक शिक्षित वर्गविषय पर डॉक्ट्रेट की डिग्री पाई।

         कुछ समय तक उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया। तत्पश्चात वे सूरत केसेन्टर फ़ॉर सोशल स्टडीज़में पोस्ट-डॉक्टरल अनुसंधान के लिए गईं। यहीं रहते हुए इन्होंने कथा-लेखन आरम्भ किया। उनकी पहली कहानीबेलपत्र१९८७ मेंहंसमें प्रकाशित हुई थी। इसके बाद दो और कहानियाँ एक के बाद एकहंसमें छपीं अब तक उनकीमाई’, ‘हमारा शहर उस बरस’, ‘तिरोहित’, खाली जगह’( उपन्यास); ‘अनुगूँज’, ‘वैराग्य’, ‘मार्च, माँ और साकुरा’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँतथायहाँ हाथी रहते थे’( कथा संग्रह) कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।

पुरस्कार एवं विशेष उपलब्धियाँ-

       इनके उपन्यासमाईने इन्हें साहित्यिक क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण मुकाम दिलवाया। इस उपन्यास का मलयालम के अलावा अग्रेंज़ी, फ़्रैंच, रूसी, जर्मन और कोरियाई भाषाओं में अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है। इनके अन्य उपन्यास, हमारा शहर उस बरस, तिरोहित और खाली जगह, भी अग्रेंज़ी और जर्मन भाषाओं में अनूदित हो चुके हैं।

     वे १९९४-१९९६ मेंसंस्कृति मंत्रालयकीसीनियर फैलोशिपप्राप्त कर चुकी हैं। सन १९९५ में उन्हें अपने कहानी-संग्रहअनुगूँजके लिएयू. के. कथा सम्मानप्रदान किया गया। जापान विश्वविद्यालय ने १९९६-९७ में उन्हेंजापान फ़ाउडेंशन फ़ैलोशिप प्रदान की। १९९८ मेंइन्दु शर्मा कथा सम्मानके अतिरिक्त उन्हेंमाईके लिए २००१ केसाहित्य अकादमी पुरस्कारसे भी सम्मानित किया गया है।  दिल्ली कीहिन्दी अकादमीने उन्हें २०००-२००१ के साहित्यकार सम्मान से अलंकृत किया है। २००४ में आपकोद्विजदेवसम्मान भी मिला। उन्हेंस्कॉटलैंड, पेरिस, स्विट्ज़रलैंड औरफ़्रांसमेंराइटर्स रेज़िडेंसीमिली और २०१३ मेंकृष्ण बलदेव वैद सम्मानभी मिल चुका है।

     कथा-रचनाकर्म के साथ-साथ वे साहित्य तथा साहित्यिक अभिव्यक्तियों के प्रति अपनी विशेष रुचि तथा योगदान देने की इच्छा से अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। वे नई दिल्ली स्थित नाट्य संस्थाविवादीतथानैश्नल स्कूल ऑफ़ ड्रामासेस्क्रिप्ट राइटरके नाते से जुड़ी हैं। उनके द्वारा लिखित नाटकजीवित या मृततथा उनके उपन्यासहमारा शहर उस बरसपर आधारित नाटक २०१० सेनैश्नल स्कूल ऑफ़ ड्रामाद्वारा रंगमंच पर प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उन्होंनेप्रतिलिपिके सलाहकार मंडल की सदस्यता भी स्वीकार की है।

       अपने लेखन में वैचारिक रूप से स्पष्ट और प्रौढ़ अभिव्यक्ति के ज़रिए उन्होंने अपने लिए एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी लगभग हर कहानी एक अलग लहज़े की कहानी है। फ़ककड़पन और दार्शनिकता का अभूतपूर्व संगम उनके साहित्य में परिलक्षित है। यही अनोखापन उन्हें एक निराला व्यक्तित्व प्रदान करता है, जहाँ हर लेख परम्परा से हट कर भी उसमें समाहित है। वे कोई समाधान नहीं देतीं, कोई उपदेश बल्कि एक शब्द, एक वाक्य और एक भाव के कई अर्थों, ध्वनियों और छवियों को पकड़ती हैं। वे समकालीन हिन्दी साहित्य में प्रतिबद्ध होने के मायनों में प्रतिबद्ध नहीं हैं, और प्रतिबद्धता का मखौल उड़ाती हैं। वे सिर्फ़ नए अदांज़ की कहानियाँ लिखती हैं, अपितु उन्हें परिष्कृत करके कुछ नए का निर्माण करती हैं।


     उन्होंने, महिला लेखक होने के नाते, स्त्री को केन्द्र में रखकर अनेक कहानियाँ लिखी हैं, परन्तु उनका रचनाक्षेत्र वहीं तक सीमित रहकर अनेकानेक विषयों को अपने में समाहित करता है कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से बदलते हमारे इस वक्त को बारीकी से देखती प्रख्यात गीतांजलि श्री ने अब तक छत्तीस कहानियाँ लिखी हैं नई उम्मीदें जगाता और नए रास्ते खोलता वक्त और हमारे अदंर घुन की तरह घुस गया वक्त भी सदा सुख-दुख, आनंद-अवसाद, आशा-हताशा के बीच भटकते मानव को थोड़ा ज़्यादा दयनीय, थोड़ा ज़्यादा हास्यास्पद बनाता वक्त विरोधी मनोभावों और विचारों को परत-दर-परत उघाड़ती हैं ये कहानियाँ इनकी विशेषता-कलात्मक उपलब्धि- है भाषा और शिल्प का विषयवस्तु के मुताबिक ढलते जाना माध्यम, रूप और कथावस्तु एकरस-एकरूप हैं हमारी ज़िन्दगी की बदलती बहुरूपी असलियत तक बड़े आड़े-तिरछे रास्तों से पहुँचती हैं ये कहानियाँ, एक बिलकुल ही अलग, विशिष्ट और नवाचारी कथा-लेखन से परिचय कराते हुए अपनी भाषाई ताज़गी के चलते उनकी कहानियाँ पाठकों को चकित एवं चमत्कृत करती हैं

Address-Y A 3, Sahavikas Apartment,68 I P Extension,New Delhi- 110092

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