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बुधवार, अक्तूबर 15, 2014

सामाजिक सुधार का बेहतर साधन केवल कबीर है-तिपानिया

सामाजिक सुधार का बेहतर साधन केवल कबीर है-तिपानिया 

सामाजिक सुधार का बेहतर साधन केवल कबीर है-तिपानिया 

चित्तौड़गढ़ 14 अक्टूबर 2014

हमारे देश की लोक संस्कृति में हमने वाचिक परम्परा को बहुत ठीक  सहेजा नहीं है।मीरा, रहीम और कबीर के पदों में हमारे सामाजिक सुधार की बहुत गुंजाइश है।तमाम किताबी ज्ञान के गुज़रने हमने अक्सर गुरु के महत्व को नहीं  समझा है।गुरु आवाज़ और उसकी लगातार संगत वह नाद है जो हमें स्थिरता की तरफ़ ले जाती है।कबीर ने अपनी साखियों और सबदों  बहुत फटकारा है। जातिवाद,साम्प्रदायिक ताकतों,आडम्बरों डूबे समाज को को बहुत कुछ कड़वा बोला है।इसलिए आज हमें  कबीर को जानने गुनने की ज़रूरत है।बाहरी साफ़-सफाई में लगे हम लोगों को अपने भीतरी मैल प्रति सचेत होना चाहिए। हम सभी एक ही पञ्च महाभूत  मिलकर बने हैं फिर ये दीवारें क्यों।इस दौर में समय रहते हमें उस परम सत्ता को समझते हुए बाकी के दिखावे और तामझाम से मन हटाना होगा

यह विचार प्रख्यात कबीर भजन गायक प्रह्लाद सिंह तिपानिया ने स्पिक मैके विरासत के आयोजन में कहे उन्होंने अपनी प्रस्तुति हिन्द ज़िंक स्कूल में दी।वहाँ कलाकारों का अभिनन्दन और दीप प्रज्ज्वलन स्कूल प्राचार्य विवेकानंद झा,संगीत अध्यापिका भानु माथुर, इम्पीरियल क्लब सचिव जी.एन.एस. चौहान किया तिपानिया ने अपने भजनों  सरल भाषा में विश्लेषण भी किया। तम्बूरे,ढोलक,वायलिन मंझीरे से सजी ये प्रस्तुतियाँ बहुत यादगार बन पड़ी।उन्होंने कई पद गाए जिनमें मन किस विध समझाऊँ,रंग महल में,कहाँ ढूंढें मंदिर में,ज़रा हौले-हौले गाड़ी हाँकों,मत कर माया का अहंकार और साहिब ने भांग पिलाई सभी सराहा।कार्यक्रम का संचालन स्पिक  मैके सचिव संयम पुरी किया

तिपानिया का दूसरा कार्यक्रम विजन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में हुआ जहां उन्होंने कमोबेश पद और साखियाँ सुनायी।यहां कॉलेज निदेशक डॉ.साधना मंडलोई, छात्र बादल शर्मा, गजेन्द्र रेगर, लोकेश कोली ने कलाकारों स्वागत किया।सभा का संचालन प्राध्यापिका अर्पिता मुंदरा ने किया ने किया।आयोजन में महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय के युवा विकास केंद्र के विद्यार्थियों ने डॉ. राजेश चौधरी के निर्देशन में भाग लिया।यहां युवा समीक्षक डॉ. कनक जैन,आकाशवाणी कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मण व्यास, जिला रोजगार अधिकारी आलोक शुक्ला,स्पिक  मैके  उपाध्यक्ष डॉ. आर.के. दशोरा, अज़ीम प्रेमजी फाउन्डेशन समन्वयक मोहम्मद उमर, अपनी माटी संस्थान सचिव डॉलर सोनी सहित कई संस्कृति प्रेमी मौजूद थे


माणिक ,राष्ट्रीय सलाहकार  

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