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माटी के मीत-3:कथाकार सूरज प्रकाश पच्चीस जुलाई को चित्तौड़ में

कथाकार सूरज प्रकाश पच्चीस जुलाई को चित्तौड़ में
माटी के मीत-3 आयोजन


चित्तौड़गढ़ 21 जुलाई,2014

साहित्य और संस्कृति की संस्था अपनी माटी द्वारा साहित्यिक विमर्श का आयोजन माटी के मीत-3 आगामी पच्चीस जुलाई को किया जा रहा है। चित्तौड़ के चामटीखेड़ा स्थित एकेसी कॉलेज में शुक्रवार शाम साढ़े पांच बजे होने वाले इस कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ कथाकार, उपन्यासकार और अनुवादक सूरज प्रकाश अपनी कहानियों का पाठ करेंगे। पाठ के बाद उपस्थित पाठकों के बीच चर्चा और लेखक से आत्मीय संवाद और प्रनोश्त्तरी का भी एक मौक़ा होगा। आयोजन संयोजक विकास अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम में कोई भी साहित्यिक और रुचिशील पाठक हिस्सा ले सकता है।

आयोजन से जुड़े संस्कृतिकर्मी माणिक और हिंदी प्राध्यापक डॉ राजेश चौधरी ने बताया कि सूरज प्रकाश ने अभी तक साहित्य के पाठकों को लगभग दो दर्जन पुस्तकें दी है।जिनमें खासकर कहानी संग्रह अधूरी तस्वीर, छूटे हुए घर, खो जाते हैं घर, मर्द नहीं रोते और छोटे नवाब बड़े नवाब शामिल हैं साथ ही इनके लिखे उपन्यासों में हादसों के बीच और देस बिराना चर्चित रहे। इसके अलावा इनके गुजराती और अंगरेजी से हिन्दी में किये हुए कई अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं। सूरज प्रकाश को जॉर्ज आर्वेल, ऐन फ्रैंक, गैब्रियल गार्सिया मार्खेज और चार्ली चैप्लिन की कृतियों के अनुवादक के रूप में जाना जाता है। सूरज प्रकाश को उनके साहित्यिक अवदान के लिए  गुजरात साहित्य अकादमी का सम्मान और महाराष्ट्र अकादमी का सम्मान मिल चुका है। रेडियो और दूरदर्शन से बीते तीस सालों से प्रसारित होते रहे हैं।

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