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सोमवार, सितंबर 02, 2013

साहित्य और संस्कृति के उपेक्षित पक्ष हेतु कार्य करेगी अपनी माटी-डॉ सत्यनारायण व्यास

चित्तौड़गढ़ 2 सितम्बर,2013
अपनी माटी के पहले अध्यक्ष बने डॉ सत्यनारायण व्यास 
अपनी माटी संस्थान का पहला आयोजन मुनि जिनविजय  पर केन्द्रित 

मुनि जिनविजय 
साहित्य और संस्कृति के प्रकल्प के रूप में अपनी माटी नामक नए संस्थान का गठन गत चार अगस्त को किया गया है। इसके पहले अध्यक्ष के रूप में हिन्दी समालोचक और कवि डॉ सत्यनारायण व्यास, सचिव श्रीमती डालर सोनी और कोषाध्यक्ष श्रीमती सीमा सिंघवी को मनोनित किया गया। चित्तौड़गढ़ नगर में स्थित सी केड सोल्यूशंस पर एक सितम्बर को आयोजित बैठक में कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से विस्तार किया गया। जहां उपाध्यक्ष वरिष्ठ गीतकार अब्दुल ज़ब्बार और सेन्ट्रल अकादेमी स्कूल के प्राचार्य अश्रलेश दशोरा को बनाया वहीं सहसचिव श्रीमती रेखा जैन और कार्यकारिणी सदस्य महेंद्र खेरारू को मनोनित किया गया।इसके साथ ही संस्थान के चयनित संस्थापक सदस्यों में शिक्षाविद डॉ ए एल जैन, सेवानिवृत प्राचार्य मुन्ना लाल डाकोत, गीतकार रमेश शर्मा, साहित्यकर्मी डॉ चेतन खमेसरा, स्वतंत्र लेखक नटवर त्रिपाठी, रमेश प्रजापत, व्याख्याता श्रीमती अंकिता पंचोली, आर्किटेक्ट चंद्रशेखर चंगेरिया को शामिल किया गया है 

अध्यक्ष चुने जाने के बाद अपने पहले वक्तव्य में डॉ व्यास ने कहा कि हमारे राज्य में  कुछ साहित्यकारों को लेकर बहुत ही कम काम हुआ है जिनमें मुनिजिंविजय जी से लेकर बावजी चतर सिंह जी, सूर्यमल्ल मिश्रण, संत भूरी बाई, विजय सिंह पथिक जैसे व्यक्तित्व शामिल हैं अपनी माटी संस्था के माध्यम से हम आने वाले वक़्त में संस्कृति के सभी पहलुओं पर कार्य करेंगे यह संस्थान धर्मनिरपेक्ष, गैर-राजनैतिक और साझेदारी के ढ़ंग से कार्य करेगा।साथ ही पत्रिका और पुस्तकों के प्रकाशन की भी योजना है। भविष्य में फिल्म फेस्टिवल सहित जनपक्षधरता पर केन्द्रित रंगमंचीय प्रदर्शन, कार्यशाला और संवाद बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा। अव्यावसायिक रवैये वाले समानान्तर संस्थानों के साथ संयुक्त तत्वावधान में समाज सापेक्ष गतिविधियों का आयोजन भी प्रस्तावित है। सभी आयोजनों को औपचारिकतारहित और उद्देश्यकेन्द्रित किया जाएगा।

नवमनोनित सचिव डालर सोनी के अनुसार अपनी माटी द्वारा आगामी सताईस अक्टूबर को जानेमाने पुरातत्वविद और विद्वान मुनिजिंविजय जी पर केन्द्रित पहला आयोजन होगा। राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से आयोज्य इस कार्यक्रम में एक सत्र भारतीय विद्याओं की प्रासंगिकता के नाम रहेगा।आयोजन में देश के प्रखर वक्ताओं सहित जिलेभर के रचनाकार शिरकत करेंगे। आयोजन को लेकर बैठक में हुयी चर्चा का संचालन डॉ राजेन्द्र सिंघवी, डॉ राजेश चौधरी और माणिक ने किया।

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