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रविवार, अगस्त 18, 2013

नाटककार मंजुल भारद्वाज यूरोप में

                          
रंगकर्मी मँजुल भारद्वाज द्वारा लिखित,निर्देशित नाटक ड्राप बाय ड्राप वॉटर का मँचन यूरोप में 26 अगस्त 2013 से 29अक्टूबर 2013 तक होगा । 65 दिन तक चलने वाले इस नाटक के शोजर्मनी,सिल्वेनिया,और ऑस्ट्रिया के विभिन्न शहरों  में मँजुल भारद्वाज द्वारा स्थापित सँस्था दि एक्सपेरिमेंटल थियेटर फाउँडेशन द्वारा आयोजित किये जायेंगे। बुरो फॉर कुल्तुर उन्द मीदिएन्न प्रोजेक्कते (Buro Fur Kultur Und-Medien Projekte) ने एक्सपेरिमेंटल थियेटर फाउँडेशन को उपरोक्त नाटक  का किंडर कुल्तुर कारवां यानि बाल नाट्य समारोह में मंचित करने के लिए आमंत्रित किया है .

नाटक ड्राप बाय ड्राप : वाटर” पानी के निजीकरण के भारत में ही नहीं दुनिया के किसी भी हिस्से में विरोध करता है और सभी सरकारों जनमानस के इस भावना  पानी हमारा नैसर्गिक और जन्म सिद्द अधिकार है से रूबरू करता है और जन आन्दोलन के माध्यम से बहुरास्ट्रीय कम्पनियों को खदेड़कर सरकार को पानी की  निजीकरण नीति वापस लेने पर मजबूर करता है.

नाटक जल बचाव , सुरक्षा और जल सवंर्धन पर जोर देते हुए पानी कैसे संस्कृति और मानव जीवन और मूल्यों को सहेजता है से दर्शकों को अवगत करता है . नाटक ड्राप बाय ड्राप : वाटर” पानी की उत्पत्ति , उत्सव और विध्वंस की यात्रा है . पानी का विकराल और विध्व्न्सात्मक रुप अभी अभी देश ने उतराखंड में एक त्रसादी के रूप में झेला है जो हमें हर पल चेताता है की प्रकृति और प्राकृतिक प्रक्रिया में लालची और मुनाफाखोर मनुष्य के सवभाव को प्रकृति बर्दाश्त नहीं करेगी !

इस नाटक को अपने अभिनय से वचिंत पृष्ठभूमि के कलाकारों ने सजीव और रोचक बनाया है. सात कलाकारों के समूह में ६ लडकियाँ और एक लड़के ने थिएटर ऑफ़ रेलेवंस नाट्य दर्शन की अवधारणा और प्रक्रिया में विगत डेढ़ वर्ष से अपने आप को तराशा है. ये कर्मठ कलाकार है अश्विनी नांदेडकर ,किरण पाल, प्रियंका रावत , काजल देओबंसी,प्रियंका वाव्हल,सायली पावसकर और मल्हार पानसरे

मंजुल भारद्वाज ' दि एक्सपेरिमेंटल थियेटर फाउँडेशन ' के माध्यम सेथिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन के द्वारा रंगकर्म से सामाजिक एवम सांस्कृतिक रचनात्मक बदलाव प्रक्रिया के लिए देश विदेश में जाने जाते हैं .दि एक्सपेरिमेंटल थियेटर फाउँडेशन ' विगत २१ वर्षों से जमीनी स्तर पर, दूरदराज के इंटीरियरआदिवासी बेल्टगांवोंकस्बोंसे लेकर सड़कोंमंच,और प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मंचों पर २८ से ज्यादा नाटकों का २५००० से ज्यादा बार मंचन किया है !मंजुल भारद्वाज भारतीय रँगमँच को विश्व मँच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। युवा रँगकर्मियों द्वारा मँचित ये नाटक यूरोप के युवा वर्ग में निश्चय ही पसँद किया जायेगा।

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