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रविवार, अगस्त 11, 2013

साहित्यकारों-कलाकारों और बुद्धिजीवियों का साझा मंच बनाने की जरूरत-प्रो. विमल

नई दिल्ली: 11 अगस्त 2013

दलित चिंतक कंवल भारती पर मुकदमे के खिलाफ आज प्रेस क्लबनई दिल्ली में जन संस्कृति मंच की ओर से एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित किया गया। जिसे संबोधित करते हुए कंवल भारती ने विस्तार से बताया कि किस तरह 6 अगस्त को उन्हें पुलिस किसी खतरनाक अपराधी की तरह घर से उठाकर ले गईकपड़ा तक नहीं बदलने दियाकम्प्यूटर भी उठा ले गए और कोर्ट में पेश करने से पहले तक उन्हें जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किसकी शिकायत पर किस इल्जाम में पकड़ा गया है। कोर्ट में उन्हें पता चला कि उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान के मीडिया प्रभारी की ओर से उन पर धारा 153-ए और 295-ए के तहत फेसबुक पर ईशनिंदा वाली टिप्पणी का आरोप लगाया गया है। कंवल भारती ने कहा कि उन्होंने फेसबुक पर दुर्गा नागपालआरक्षण और आजम खान की कार्यशैली पर सवाल उठाया थाजिसके कारण उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाया गया। जबकि किसी भी मसले पर अपने राय जाहिर करने का उनका संवैधानिक अधिकार है।

कंवल भारती के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुकुमार मुरलीधरन ने कहा कि मुख्यधारा की मीडिया से अलग जो प्रतिरोध की आवाजें उभर रही हैंउनसे डरी हुई सत्ताएं बदला लेने पर उतारू हैं। यह पहली बार नहीं है कि किसी संस्कृतिकर्मी को सोशल साइट पर लिखने के लिए इस तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और ना ही ये अंतिम बार है। ये सत्ताओं के संकट का परिणाम हैजो बढ़ता ही रहेगालिहाजा इसके लिए हमें सतत तैयार रहने की जरूरत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि ये अभियोग सीधे सीधे न्यायपालिका के द्वारा ही खारिज कर देना चाहिए और हमें सिर्फ रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक रवैया अख्तियार करना चाहिए। कंवल भारती के खिलाफ फर्जी मुकदमे के लिए जिम्मेदार मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ हमें मुकदमा करना चाहिएउनके कम्प्यूटर का जब्त किया जाना और अचानक बिना ठीक से कपड़ा भी बदलने का मौका दिए हुए गिरफ्तार करके ले जाना खुद में एक बड़ा अपराध है।

दलित लेखक संघ के अध्यक्ष वरिष्ठ लेखक प्रो. तुलसी राम ने कहा कि जातिधर्म और क्षेत्र के आधार पर जो धु्रवीकरण हो रहा हैवह राष्ट्रीय एकता और सामाजिक एकता के लिए बहुत घातक है। इस धु्रवीकरण से चुनावों के जरिए जो ताकतें आ रही हैंवे जनतंत्र और जनवादी मूल्यों की दुश्मन हैं। इनके विरुद्ध सामाजिक जागृति के लिए संघर्ष करना होगाये कमजोर होंगीतभी सेकुलर और जनवादी स्टेट बनेगा। कंवल भारती का मामला भी इसका उदाहरण है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति बेहद खतरनाक दिशा में जा रही हैयह राजनीति न केवल जातिवादी हैबल्कि सांप्रदायिक बुनियादपरस्त भी हैइसके खिलाफ लड़ना जरूरी है।फिल्मकार संजय काक ने कहा कि कंवल भारती पर मुकदमे के खिलाफ जिस तरह अलग-अलग दिशाओं और क्षेत्रों से लोग आए हैंवह उम्मीद बंधाता है।

दलित अस्मिता की प्रो. विमल थोरात ने कहा कि धर्म और सत्ताएं जब साथ-साथ चलती हैं तो इसी तरह के दमन के मामले सामने आते हैं। आज जरूरी है कि संस्कृतिकर्मी-बुद्धिजीवी सत्ता पर निगरानी का काम करें। उन्होंने साहित्यकारों-कलाकारों और बुद्धिजीवियों का साझा मंच बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

चर्चित लेखिका अनिता भारती ने कहा कि फेसबुक आज अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बन चुका हैइसे असहिष्णुता से बचने की जरूरत है। छोटे स्तर की लड़ाइयों से लेकर बड़ी लड़ाइयों को एक समान महत्व देना होगा।

जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कवि मंगलेश डबराल ने कहा कि कंवल भारती पर मुकदमा लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है। लोकतंत्र जिस तरह माफिया तंत्र में तब्दील होता जा रहा हैउसके लिए और साझी लड़ाइयों की जरूरत बढ़ती जा रही है।

जनवादी लेखक संघ के महासचिव आलोचक चंचल चौहान ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में नागरिकों को जो मौलिक अधिकार दिए हैंकंवल भारती ने उनका ही इस्तेमाल किया है। लेकिन उनके खिलाफ जिस तरह मुकदमा किया गया हैवह खुद ही संविधान का उल्लंघन है। यह जनवाद के लिए भी खतरनाक है। 

जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय ने कबीर की पंक्तियों के हवाले से कहा कि आज धर्म की गाय को आज सत्ता के सिंह चरा रहे हैंसांप्रदायिक सद्भावधार्मिक सद्भाव की गाय को भी वे चरा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बीसियों दंगे हुए पर किसी अफसर या सांप्रदायिक तत्व को दंड नहीं दिया गयापर कंवल भारती पर फर्जी मुकदमा करके आनन-फानन में गिरफ्तार किया गया। उत्तर प्रदेश में आज दलित-अल्पसंख्यकों की हिरासत में मौतें हो रही हैं। सपा-बसपा दोनों प्रभुवर्ग को रिझाने में लगे हुए हैं। सच बोलने पर सत्ता लोगों को दंडित कर रही है। सच बोलने पर पाबंदी लगाने वाले ही अभिव्यक्ति की आजादी का हनन करते हैं।

चर्चित रंगकर्मी अरविंद गौड़ ने कहा कि एक साझा एक्शन प्लान बनाना चाहिएताकि इस तरह जब भी किसी लेखक या कलाकार को उत्पीडि़त किया जाएतो मजबूत प्रतिरोध हो।

प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव अली जावेद ने कहा कि आजम खान को बेबुनियाद आरोप देने में महारत हासिल है। उत्तर प्रदेश की सरकार दंगे भड़काने वालों के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैपर मस्जिद गिराने के झूठे आरोप में एक पदाधिकारी को निलंबित कर दे रही है। कंवल भारती ने उसकी गलती पर उंगली उठाई तो उन पर भी मुकदमा कर दिया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक धु्रवीकरण की राजनीति पर सवाल उठाते हुए उसके खिलाफ संघर्ष को जारी रखने की अपील की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का संचालन करते हुए जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण ने कहा कि जब तक कंवल भारती पर से मुकदमा वापस नहीं होतातब तक आंदोलन जारी रहेगा। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश भर में इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। कल 12 अगस्त को 3 बजे जंतर मंतर पर भी तमाम लेखक-संस्कृतिकर्मी मुकदमे की वापसी के लिए धरना देंगे।

इस मौके पर कवि इब्बार रब्बीउद्भ्रांतविमल कुमारकथाकार योगेंद्र आहूजाचित्रकार सवि सावरकर,पत्रकार पाणिनि आनंदअभिषेक श्रीवास्तवजितेंद्र कुमारराजनीतिक कार्यकर्ता सुभाष गाताड़ेबीएस भारतीउद्भावना के संपादक अजेय कुमारलेखक प्रेमपाल शर्माअनुराग शर्मा समेत कई लोग मौजूद थे।
सुधीर सुमन
जन संस्कृति मंच द्वारा जारी
मोबाइल 9868990959

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