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सोमवार, अगस्त 12, 2013

''संगठित प्रतिरोध बहुत जरूरी है। ''- सुबोध मालाकार

नई दिल्ली: 12 अगस्त 2013

कल कंवल भारती के प्रेस कांफ्रेंस में एकजुटता जाहिर करने के बाद आज दिल्ली के साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों ने उनकी अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थन में जंतर मंतर पर धरना दिया। इस बीच दलित लेखक संघदलित साहित्य और कला मंच तथा संवादिता नामक संस्था ने भी प्रलेसजलेस और जसम के संयुक्त बयान का समर्थन किया है और इन तमाम संगठनों के नाम से संयुक्त बयान की कॉपी आम लोगों के बीच बांटी गई। आज के धरने में यह तय किया गया कि अगर यूपी की अखिलेश सरकार कंवल भारती पर से फर्जी मुकदमा वापस नहीं लेतीतो आने वाले दिनों में साहित्यकार संस्कृतिकर्मी यूपी भवन का घेराव करेंगे और किसी एक तारीख को देश के कई हिस्सों में साहित्यकार-संस्कृतिकर्मी एक साथ यूपी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। साहित्यकार-संस्कृतिकर्मियों ने हाथ में प्ले कार्ड्स ले रखे थेजिन पर लिखा था- जातिवादी-सांप्रदायिक धु्रवीकरण की राजनीति बंद करोकंवल भारती पर से मुकदमा वापस लोआजम खान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करोअभिव्यक्ति की आजादी का दमन बंद करो।

आज धरने को संबोधित करते हुए जलेस के महासचिव चंचल चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली की जो स्थिति रहते है और जिस तरह के बुनियादी संकट हैंउसमें बहुत बड़ी तादाद के लिए फेसबुक ही नहींबल्कि ढंग से बुक भी देख पाना मुश्किल है। इसके बावजूद अगर फेसबुक पर किसी टिप्पणी से सरकार का कोई मंत्री घबराता हैतो इससे साबित होता है कि वह कितना असहिष्णु है। उन्होंने कहा कि आज साहित्यकारों-संस्कृतिकर्मियों को संगठित न होने देने की कोशिशें बहुत हो रही हैइसलिए कंवल भारती के मुकदमे की वापसी के लिए संगठनों की जो एकजुटता बनी हैउसे और भी मजबूत बनाने की जरूरत है।

जलेस के ही युवा आलोचक संजीव कुमार ने कहा कि राष्ट्रवाद के नाम पर एक से एक सांप्रदायिक अभिव्यक्तियां की जा रही हैंपर इसके लिए किसी पर कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही हैलेकिन एक लेखक सिर्फ एक मंत्री और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाता हैतो उसे आनन फानन में जेल में डाल दिया जाता है।

दिल्ली जसम के संयोजक चित्रकार अशोक भौमिक ने कहा कि हम आपातकाल दिवस पर भी जंतर मंतर पर दमन की संस्कृति के खिलाफ आए थेकंवल भारती समेत अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी लगाने वाले जितने मामले हैंहम उन पर संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह लड़ाई जारी रहेगी।

जेएनयू टीचर संघ और प्रलेस से जुड़े सुबोध मालाकार ने कहा कि भविष्य में इस तरह के खतरे बढ़ने वाले हैंइसलिए संगठित प्रतिरोध बहुत जरूरी है। पत्रकार अंजनी ने कहा कि पूरे देश में दमनकारी स्थिति बनी हुई हैमारुती के मजदूरों को जेल में बंद हुए एक साल से अधिक हो गए हैं,पर उनकी रिहाई नहीं हो रही है। आंध्र प्रदेश में क्रांतिकारी लेखक की हत्या कर दी जा रही है। कंवल भारती को एक छोटे से कमेंट के कारण जेल में डाल दिया जाता है। ये सारे कृत्य कमजोर सरकारों की निशानी हैं। बनास के संपादक पल्लव ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकतीइसका एकताबद्ध होकर विरोध करना होगा। दलित मुक्ति के संघर्षों और विमर्शों से जुड़ी लेखिका अनिता भारती ने कहा कि कंवल भारती को जिस तरह से गिरफ्तार किया गयावह अपमानजनक है। यूपी पुलिस और उनके मंत्री ने एक लेखक के सम्मान का भी हनन किया है। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार मुकदमे को वापस ले और लेखक से माफी मांगे।

जसम के महासचिव प्रणय कृष्ण ने कहा कि अभिव्यक्ति का गला घोंटने वाली व्यवस्था अंदर से बहुत डरी हुई व्यवस्था होती है। जितना ही व्यवस्था के संकट बढ़ते हैंउतना ही दमन बढ़ता है। लेकिन दमन के खिलाफ प्रतिरोध भी होता है और आज भी हो रहा है। कबीर कला मंच के कलाकारों और सुधीर ढवले की गिरफ्तारी का सवाल हो या सीमा आजाद का बुद्धिजीवियोंसंस्कृतिकर्मियों ने एकजुट होकर इसका प्रतिरोध किया है। जमानत मिल जाने के बाद कंवल भारती को जिस तरह दूसरे फर्जी मामले में फंसाने की साजिश रची जा रही हैउसका भी प्रतिवाद किया जाएगा। उन पर लादे गए फर्जी मुकदमे की वापसी के लिए चल रहे इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।

इंकलाबी नौजवान सभा के असलम ने कहा कि सरकारें मजदूरोंआदिवासियोंअल्पसंख्यक नौजवानोंमहिलाओं पर लगतार दमन ढा रही हैं। इंतहा ये है कि फेसबुक पर की जा रही टिप्पणी भी उनसे बर्दाश्त नहीं हो पा रही है। सरकारों का इस तरह के दमनकारी रुख के खिलाफ एक बड़ी संघर्षशील एकजुटता बनाने की जरूरत है।

कंवल भारती के साथ काम कर चुके रामरतन बौद्ध ने उनके विद्रोही तेवर वाले लेखन की चर्चा की और कहा कि वे सच को लिखते हैंफेसबुक पर भी उन्होंने सच ही लिखा थाजो सरकार को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। सरकार ने जिस तरह का कंवल भारती के साथ व्यवहार किया हैउसने बहुत लोगों को उनके साथ खड़ा कर दिया है।

प्रलेस के महासचिव अली जावेदकवि अनुपमश्याम सुशीलरविप्रकाशचित्रकार सवि सावरकर,रंगकर्मी अरविंद गौड़तिरछी स्पेलिंग ब्लॉग के संपादक उदय शंकरयुवा आलोचक गोपाल प्रधान,आशुतोषमार्तंड प्रगल्भचारुनीरजब्रजेशगौतमनीलमणिशौर्यजीतपत्रकार रविकांतअभिषेक श्रीवास्तव आदि भी धरने में मौजूद थे। संचालन सुधीर सुमन और अवधेश ने किया।

1 टिप्पणी:

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

संगठित प्रतिरोध जरूरी है।

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