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सोमवार, अक्तूबर 08, 2012

''राजस्थानी की मान्यता लोकतंत्र का तकाजा है और इसकी अधिक समय तक अनदेखी नहीं की जा सकती है। ''-विजय दान देथा ‘बिज्जी’



जोधपुर, 8 अक्टूबर।

राजस्थानी भाषा के प्रख्यात साहित्यकार विजय दान देथा ‘बिज्जी’ ने रविवार को  बोरूंदा में राजस्थानी साहित्य को समर्पित एकता प्रकाशन , चूरू की वेबसाइट www.ekataprakashan.com  का लोकार्पण किया। 

इस मौके पर बिज्जी ने कहा कि राजस्थानी दुनिया की समृद्धतम भाषा है और इसकी मान्यता यहां के लोगों की अस्मिता का सवाल है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी में दुनिया की सभी भाषाओं से अधिक समृद्ध शब्द भंडार है और राजस्थानी शब्दों  की अभिव्यक्ति सामर्थ्य बेजोड़ है। राजस्थानी की मान्यता लोकतंत्र का तकाजा है और इसकी अधिक समय तक अनदेखी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता और जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर राजस्थानी की मान्यता के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थानी की जितनी पुस्तकें प्रकाशित   होंगी, उतना ही महत्वपूर्ण हैं। पुस्तकें व्यक्ति को संस्कारित और गुणवान बनाती हैं और किसी भाषा के लिए काम करने वाले जितने अधिक लोग होंगे, उस भाषा का भविष्य उतना ही बेहतर है। 

उन्होंने चूरू क्षेत्र में चल रही साहित्यिक गतिविधियों और एकता प्रकाशन की सराहना करते हुए कहा कि  प्रकाशन मायड़ भाषा के साहित्य भंडार की समृद्धि के लिए जो कार्य कर रहा है, वह निश्चय ही राजस्थानी के लिए मील का पत्थर बनेगा। उन्होंने कहा कि लेखन की समृद्धि के लिए सकारात्मक सोच वाले प्रकाशकों की बहुत जरूरत है। उन्होंने प्रकाशन के दुलाराम सहारण से कहा कि वे  प्रकाशन को व्यवसाय नहीं बनाकर राजस्थानी की मान्यता के लिए एक मिशन की तरह कार्य करें। उन्होंने कहा कि राजस्थानी साहित्य लेखन से जितने लोग जुड़ें, उतना ही अच्छा है। राजस्थानी साहित्यकारों को भी मान्यता के लिए एक मंच पर जुटना चाहिए। 

एकता प्रकाशन  के प्रबंधक दुलाराम सहारण ने इस मौके पर गतिविधियों की जानकारी दी और कहा कि वे राजस्थानी के लिए प्रमुखतः काम करने के लिए संकल्पबद्ध हैं। इस मौके पर युवा साहित्यकार कुमार अजय, चिमनाराम आदि मौजूद थे।

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