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गुरुवार, अक्तूबर 18, 2012

हिन्दी पत्रिका ‘रेवान्त’ की ओर से मुक्तिबोध साहित्य सम्मान


रिपोर्ट:-अलका प्रमोद
  लखनऊ 

दिनांक 13.10.12 को लखनऊ राष्ट्रीय पुस्तक मेले के पंडाल मे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पत्रिका ‘‘ रेवान्त’’ की ओर से चिर्चित युवा रचनाकार कवयित्री सुशीला पुरी को ‘‘मुक्ति बोध साहित्य सम्मान 2012’’ दिया गया। लखनऊ से निकलने वाली हिन्दी पत्रिका ने इस सम्मान की शुरुआत की तथा पत्रिका की संपादक डॉ0 अनीता श्रीवास्तव ने इस मौके पर कहा कि हर साल प्रखर रचनाकार को इस सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इसका उद्देश्य मुक्तिबोध की साहित्य धारा का संवर्द्धन है।

सम्मान समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने की। हिन्दी संस्थान के निदेशक एवं चर्चित साहित्यकार सुधाकर अदीब, ‘दुनिया इन दिनों’ के संपादक सुधीर सक्सेना, तथा उपन्यासकार व पत्रकार प्रदीप सौरभ कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे।कार्यक्रम का सफल संचालन कवि व उपन्यासकार वीरेन्द्र सांरग ने थामी । ‘रेवान्त’ पत्रिका की संपादक डा0 अनीता श्रीवास्तव ने सभी का स्वागत करते हुये बताया कि पत्रिका दो वर्ष की आयु प्राप्त कर चुकी है। उन्होंने यह संकल्प भी दोहराया कि वे प्रयत्न करेंगी  कि पत्रिका आगे बढ़े और पाठकों के मानस पर अंकित हो।रंगकर्मी विजय बनर्जी ने सुशीला पुरी की कविताओं का ,उनके सूक्ष्म भावों को स्वर में उतारते हुये पाठ किया । कुछ पंक्तिया यूं थीं:

’’ याद आई ऐसे जैसे हवा आई चुपके से
और रच गई सांस बिना किसी आहट के।‘‘
’’प्रेम वक्रोक्ति नही अतिशयोक्ति जरुर है ‘‘

काव्य पाठ के पश्चात सुशीला पुरी को सम्मानित करते हुये कवि नरेश सक्सेना  ने उन्हे उत्तरीय से अलंकृत किया, प्रदीप सौरभ ने स्मृति चिन्ह भेंट किया तथा सुधाकर अदीब ने रू0 ग्यारह हजार का चेक प्रदान किया तथा  सुधी श्रोतागणों ने करतल ध्वनि से सुशीला पुरी का सम्मान किया । सुशीला पुरी ने अपने वक्तव्य में कहा ’’ गजानन माधव मुक्तिबोध मेरे लिये आकाश की तरह हैं, वो आदरणीय और आशीष की तरह हैं । उनके नाम से कुछ भी प्राप्त होना मेरे लिये महत्वपूर्ण है । उन्होने यह भी कहा कि कविता मेरे लिये मां की गोद है ,कविता के बिना समग्रता में जीवन नही । सुशीला पुरी ने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया।  

सुधीर सक्सेना ने बताया कि सुशीला जी अत्यन्त संभावनाशील रचनाकार हैं जिन्होंने अपनी कविताओं तथा समीक्षात्मक टिप्पणियों के द्वारा गहरा प्रभाव छोड़ा है। ‘दुनिया इन दिनों’ में उनका स्तम्भ सर्वाधिक पढ़ा जाता है । सुधाकर अदीब के शब्दों में सुशीला जी बहुत अच्छी टिप्पणी लिखती है ,वो भावनाओं की सूक्ष्म अभिव्यक्ति वाली कवयित्री हैं।और कागज से इन्टरनेट तक लिख रही हैं । इन्दुमती अंतरार्ष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित प्रदीप सौरभ ने सुशीला पुरी को ऊर्जावान कवयित्री कहा ,उनके अनुसार जब हम हर प्रकार के संकट से जूझ रहे हें प्रेम पर कविताएं लिखना बहुत साहस का काम है । कवि नरेश सक्सेना ने  अपने काव्य संग्रह चारूशीला के प्रकाशन का श्रेय सुशीला पुरी को देते हुये कहा कि अनीता जी को बधाई दी कि मुक्तिबोध जैसे बड़े साहित्यकार के नाम से पुरस्कार देकर मुक्तिबोध जैसे रचनाकार को अपनी पत्रिका और लखनऊ के नाम कर लिया। आश्चर्य होता है कि मुक्तिबोध के नाम आज तक कोई सम्मान व पुरस्कार नहीं है। ऐसे में रेवान्त के द्वारा शुरू किया गया यह कार्य अत्यन्त जरूरी है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लखनऊ के रचनाकार व साहित्य सुधी पाठक व श्रोता उपस्थित थे।

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