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शनिवार, सितंबर 15, 2012

थेंक्स टू स्पिक मैके@ शास्त्रीय नृत्य की सजीव प्रस्तुति पहली बार देखी

प्रेस विज्ञप्ति 

थेंक्स टू  स्पिक मैके@ 
शास्त्रीय नृत्य की सजीव प्रस्तुति पहली बार देखी 

चित्तौड़ से बारह किलोमीटर दूर अरनियापंथ के उच्च प्राथमिक बालिका स्कूल परिसर में पंद्रह सितम्बर को विद्यार्थियों ने जीवन में पहली बार कोई शास्त्रीय नृत्य देखा। स्पिक मैके  की ओडिसी नृत्य कार्यशाला ही एक ज़रिया बनी जहां बच्चों ने गीतांजली आचार्य से न केवल नृत्य भाव देखा बल्कि उसके कुछ स्टेप्स सीखे भी।नृत्य की भंगिमाओं के अभ्यास के लिए छात्राओं में स्टेज पर आने के लिए होड़ मच गयी।उमस और भरी गर्मी के बीच भी कलाकार और रसिकों के बीच एक घंटे तक ओडिसी संस्कृति से जुड़ा एक सफ़र तय हुआ।लगभग एक सौ पच्चीस छात्राओं ने आयोजन का पूरा आनंद लिया। ग्रामीण क्षेत्र की इन बालिकाओं ने अपने सहज तरीके से गीतांजली आचार्य का बहुत मान किया।

देश के जानेमाने मगर अब दिवंगत गुरु केलुचरण महापात्र की शिष्या गीतांजली आचार्य ओडिसी से जुड़े ज़रूरी ज्ञान को बहुत मन से विद्यार्थियों तक पहुँचाया। शुरू में दीप प्रज्ज्वलन सरपंच हरिशंकर सालवी, वरिष्ठ अध्यापक प्रेमदास वैष्णव, उमावि अरनियापंथ के प्राधानाचार्य माँगीलाल मेनारिया, नोडल प्रभारी उषा वैष्णव, अध्यापिका शशी सिंह, अनिता सिसोदिया, दीपमाला गौड़,  स्पिक मैके पूर्व सचिव लालुराम सालवी, स्थानीय ग्रामों में जगदीश जाट, सतीश कुमार, राजाराम ने किया। प्रस्तुति का सञ्चालन माणिक ने किया।

स्पिक मैके  संभागीय समन्वयक जे पी भटनागर के अनुसार राजकीय स्कूलन में ये गीतांजली की आख़िरी प्रस्तुति थी। शीघ्र ही आसपास के बाकी स्कूलों हेतु भी कार्यशालाएं करवाने का प्रसाय किया जाएगा।विरासत 2012 का अगले आयोजन में दक्षिण भारतीय संस्कृति की यक्षगान परम्परा से जुडा कार्यक्रम होगा। इसी सन्दर्भ में कठपुतली द्वारा प्रदर्शन करने में माहिर गुरु भास्कर कोग्गा कामथ दो अक्टूबर को चित्तौड़ में अपनी प्रस्तुति देंगे।

डॉ ए  एल जैन 

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