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शुक्रवार, सितंबर 14, 2012

''पठनीयता लिए हुए ये कहानियां आलोचना के मानदंडों पर भी ठीक उतरती हैं।''-पल्लव @भोभर पर कृतिचर्चा


  • 'हर कहानी में उप-पाठ*
  • भोभर पर कृतिचर्चा 
जयपुर स्थित राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी में पिछले दिनों चर्चित युवा कहानीकार रामकुमार सिंह के पहले कहानी संग्रह 'भोभर तथा अन्य कहानियां'(लोकायत प्रकाशन, जयपुर द्वारा प्रकाशित ) पर कृतिचर्चा हुई।अकादमी और कलम की ओर से आयोजित इस चर्चा में मुख्य वक्ता दिल्ली के युवा आलोचक और 'बनास जन ' के सम्पादक पल्लव ने कहा -'' कहानीकार ने अपनी कहानियों में गांव के किशोरों की कथा कही हैं। साथ ही गांवों के बदलते नैतिक मूल्यों को भी स्थान दिया है। कहानियों का लोकेल इसकी ताकत है। प्रामाणिकता में गांव का आना इन कहानियों को महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा कि कहानीकार अपने समय से लगातार संवाद करते चलते हैं, उससे कहीं दूर नहीं हुए हैं। जबरदस्त पठनीयता लिए हुए ये कहानियां आलोचना के मानदंडों पर भी ठीक उतरती हैं। इनको पढना हमारी कहानी पंरपरा और समय को पढ लेना है। ''

इससे पहले मीमांसा के संपादक राजाराम भादू ने विषय  प्रवर्तन करते हुए कहा '' पुस्तक में आठ कहानियां है जो एक दूसरे से कहीं मेल नही खाती है, यही रचाव का वह अच्छा गुण है जो लेखक की कहानियों में लगातार दिखाई देता है। 'गिलहरी', 'रामलीला का लक्ष्मण', और 'पूर्व संध्या तथा पांच यार' कहानियां ग्रामीण युवाओं की दुनिया से मिलवाती है। 'गुरू दक्षिणा', 'भोभर' तथा ' बेटियों का घर' कहानियों में ग्रामीण संदर्भ में नई विषयवस्तु  और भाषा के बरताव दिखाई देते हैं। वहीं इस संग्रह में दो कहानियां शहरी परिवेश की सशक्त कहानियां है।''

इसके बाद कहानीकार रामकुमार सिंह ने अपनी लेखन प्रक्रिया और कहानीकार के तौर पर अपने विकास को श्रोताओं से बांटते हुए कहा कि एक तो बचपन में मिली किस्सागोई और फिर शहर आने पर गांव के दोस्तों को अपनी काल्पपिक प्रेमिकाओं के किस्से सुनाते हुए शायद कहानी कहना कब शुरू कर दिया, पता ही नहीं चला। उन्होंने अपनी एक कहानी ''रामलीला का लक्ष्मण'' का पाठ भी किया जिससे श्रोता बेहद आनंदित हुए।

राजस्थान विवि में हिंदी के प्रोफेसर रवि श्रीवास्तव ने कहा कि पठनीयता के साथ हर कहानी में उप-पाठ होने की संभावनाएं इन कहानियों की बहुत बडी खूबी है। उन्होंने संग्रह में से अपने प्रिय अंशों का पाठ भी किया। सुपरिचित कथाकार रामांनद राठी भी रामकुमार सिंह  की कहानियों की घोर पठनीयता से सहमत थे। वहीं उन्होंने लेखकीय संवेदनाओं के स्तर और जरूरत को अच्छे लेखन की जरूरी कसौटी बताते हुए उस पर रामकुमार की कहानियों को सार्थक और सफल मानने की बात कही। वरिष्ठ कथाकार चरणसिंह पथिक ने भी जरूरी हस्तक्षेप करते हुए रामकुमार सिंह की कहानियों को राजस्थान के नए कहानीकारों में महत्वपूर्ण आवाज बताया।

अकादमी निदेशक डॉ. आर डी सैनी ने कहा कि इन कहानियों में गांव, यारबाजी हास्य व्यंग्य, पत्रकारिता और शराब चार की सघन उपस्थिति है। कार्यक्रम में राजस्थान के अनेक वरिष्ठ और जाने माने लेखक तथा बुद्धिजीवी, कथाकार और कवि-शायर उपस्थित थे।कृतिचर्चा का संचालन युवा कवि-कथाकार दुष्यंत ने किया।

कार्यक्रम स्थल पर लोकायत प्रकाशन के स्टॉल पर कार्यक्रम में उपस्थित शब्दप्रेमियों का उत्साह भी देखने लायक था। वहां रामकुमार सिंह के कहानी संग्रह के अलावा'कुरजां' ,'नया पथ' तथा 'बनास जन'  पत्रिकाओं के नए अंक भी काफी मात्रा में खरीदे गए।  उपस्थित शब्दप्रेमियों द्वारा खरीदी गई अपनी किताब की प्रतियों पर रामकुमार सिंह कई देर तक मुदित भाव में ऑटोग्राफ देते दिखाई दिए।

रपट-
डॉ.दुष्यंत 
ई-मेल पता-dr.dushyant@gmail.com

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