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मंगलवार, जुलाई 17, 2012

डॉ. मनोज श्रीवास्तव को 'रंग-अभियान रजत जयन्ती सम्मान'


डॉ. मनोज श्रीवास्तव को 'रंग-अभियान रजत जयन्ती सम्मान'

बेगूसराय
डा. मनोज श्रीवास्तव
आप भारतीय संसद की राज्य सभा में सहायक निदेशक है.अंग्रेज़ी साहित्य में काशी हिन्दू विश्वविद्यालयए वाराणसी से स्नातकोत्तर और पीएच.डी.

लिखी गईं पुस्तकें-पगडंडियां(काव्य संग्रह),अक्ल का फलसफा(व्यंग्य संग्रह),चाहता हूँ पागल भीड़ (काव्य संग्रह),धर्मचक्र राजचक्र(कहानी संग्रह),पगली का इन्कलाब(कहानी संग्रह),परकटी कविताओं की उड़ान(काव्य संग्रह,अप्रकाशित)

आवासीय पता-.सी.66 ए नई पंचवटीए जी०टी० रोडए ;पवन सिनेमा के सामने,
जिला-गाज़ियाबाद, उ०प्र०,मोबाईल नं० 09910360249
,drmanojs5@gmail.com)








दिनांक 9 जुलाई, 2012 को डॉ. अनिल पतंग द्वारा संचालित नाट्य विद्यालय, बेगूसराय के तत्वावधान में बेगूसराय (बिहार) के दिनकर भवन में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रंगमंच विशेषज्ञ और नाटककार डॉ. अनिल पतंग ने इस कार्यक्रम का आयोजन अपनी अनियतकालीन पत्रिका 'रंग-अभियान' के 25वें अंक के प्रकाशन के उपलक्ष्य में किया था। पत्रिका के रजत जयंती प्रकाशन के सुअवसर पर देश के दूर-दराज के रंगमंच कलाकारों, विशेषज्ञों और शिक्षकों को आमंत्रित किया गया था। इस अवसर के आयोजन का उद्देश्य अनियतकालीन पत्रिका 'रंग-अभियान' में प्रकाशित कुछेक नाटककारों की नाट्य रचनाओं को सम्मानित करना भी था। तदनुसार, प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मनोज श्रीवास्तव को 'रंग-अभियान रजत जयन्ती सम्मान' से विभूषित किया गया। बेगूसराय के महापौर श्री आलोक कुमार अग्रवाल ने उन्हें शाल ओढ़ाकर मान-पत्र प्रदान किया और डॉ. श्रीवास्तव के साहित्यिक अवदान की चर्चा की। उन्हें प्रतीक चिह्न के रूप में भगवान नटराज की मूर्ति भी भेंट की गई। उल्लेख्य है कि डॉ. श्रीवास्तव के साथ-साथ पूर्णिया (बिहार) के लब्ध-प्रतिष्ठ कथाकार प्रो. चन्द्रकिशोर जायसवाल और पटना विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर और वरिष्ठ लेखक डॉ. तैयब हुसैन को भी उनकी श्रेष्ठ नाट्य रचनाओं के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में 'रंगमंच : पत्रकारिता, जनसरोकार, स्वैच्छिक संगठन और सरकार' विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी का आग़ाज़ करते हुए मुख्य अतिथि श्री मनोज कुमार, जिला कलक्टर ने विद्वानों को संगोष्ठी के विषय पर अपने विचार प्रकट करने के लिए आमंत्रित किया। प्रमुख वक्ता डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने भारतीय रंगमंच की समृद्ध प्राचीन परंपरा पर पूर्वापेक्षी दृष्टि डालते हुए कहा कि आज बाजारवादी अपसंस्कृति के ख़तरनाक़ दौर में रंगमंच अपनी सार्थकता और महत्ता खोता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की उपेक्षावादी नीतियों के मद्देनज़र स्वयं रंगमंचीय कलाकारों, निदेशकों और प्रोड्युसरों को आगे आना चाहिए और ऐसा प्रयास करना चाहिए कि रंगमंच राज्याश्रयी न होकर लोकाश्रयी हो। इसमें जनता की प्रत्यक्ष सहभागिता अपेक्षित है। उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार विभिन्न कार्यालयों और सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में हिंदी पखवाड़ा, हिंदी मास, पर्यावरण मास आदि मनाया जाता है, उसी प्रकार देश-भर में रंगमंच पखवाड़ा और रंगमंच मास का आयोजन किया जाना चाहिए। प्रत्येक वर्ष 27 मार्च को विश्व-भर में रंगमंच दिवस मनाया जाता है; परंतु, भारत में रंगमंचीय कलाकारों को इसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। 

ग्रामीण और नगरीय स्तर पर 'भारत रंग-महोत्सव', 'सुमन रंग-महोत्सव' की तर्ज़ पर नाट्य उत्सव आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने हिंदी प्रदेशों में रंगमंच की शोचनीय स्थिति पर क्षोभ व्यक्त किया और कहा कि हिंदी रंगमंच को बंगाल और महाराष्ट्र की समृद्ध रंगमंच परंपरा से सबक लेना चाहिए जहाँ रंगमंच आज भी फल-फूल रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विभिन्न खेलों में पदक और पुरस्कार दिए जाते हैं, उसी प्रकार नाट्य मंचन पर पुरस्कार और पदक दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि भारतीय रंगमंच आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है, इसलिए एक राष्ट्रव्यापी रंगमंच निधि स्थापित किया जाना चाहिए।संगोष्ठी में अन्य बुद्धिजीवियों ने भी अपने जुझारु विचार व्यक्त किए। प्रो. चन्द्र किशोर जायसवाल, डा. तैयब हुसैन, प्रो. प्रफ़ुल्ल कुमार सिंह मौन, डॉ. रामनरेश पंडित 'रमण', अश्विनी कुमार आलोक, श्री राजेन्द्र राजन, डॉ. सीताराम सिंह प्रभंजन, श्री सर्वेश कुमार, प्रो. बेंकटेश, डॉ. सुरेश प्रसाद रॉय, डॉ. केदारनाथ कंत और कई प्रबुद्ध पत्रकारों और लेखकों ने अपने विचार प्रकट किए।

दूसरे सत्र में, डॉ. मनोज श्रीवास्तव के उत्कृष्ट नाट्य रचना 'किराए का मकान' का हृयस्पर्शीय मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन श्री सुमन भारती ने किया जबकि मंच प्रभारी श्री शिव प्रकाश थे। नाट्य मंचन को देखने के लिए बेगूसराय की जनता उमड़ पड़ी थी। इसके अतिरिक्त, प्रो. चन्द्र किशोर जायसवाल की नाट्य रचना 'विशनपुर स्वाहा' और डॉ. तैयब हुसैन की नाट्य रचना 'गंगा स्नान' का भी आकर्षक और सराहनीय मंचन किया गया। ख़ास बात यह है कि बेगूसराय की जनता की मंचन और रंगमंच प्रस्तुति में बेबाक दिलचस्पी है। जनता ने तालियाँ बजाकर नाटककारों के उत्कृष्ट आलेख की सराहना की।

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में डॉ. मनोज श्रीवास्तव की नाट्य रचना 'किराए का मकान' पर चर्चा की गई। तत्पश्चात डॉ. श्रीवास्तव ने भी नाटक में अन्तर्निहित विचारधारा का उल्लेख किया। डॉ. चन्द्र किशोर जायसवाल और डॉ. तैयब हुसैन ने भी अपने नाटकों के विशिष्ट लक्षणों की चर्चा की। उसके बाद महापौर श्री आलोक कुमार अग्रवाल द्वारा डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने सम्मानित किया। डॉ. चन्द्र किशोर जायसवाल और डॉ. तैयब हुसैन को भी इसी क्रम में सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनिल पतंग की बहुचर्चित नाट्य रचना 'जट-जटिन' का मंचन किया गया। इस नाटक का मंचन एक हजार से भी ज़्यादा बार हो चुका है। उसके बाद रंगमंच के प्रति समर्पित कलाकार, हाजीपुर के श्री सुधांशु चक्रवर्ती को सम्मानित किया गया। इस रंग-बिरंगे समारोह का समापन डॉ. अनिल पतंग द्वारा दिल्ली, पटना, पूर्णिया, ग़ाज़ियाबाद आदि से आए मेहमानों को दिए गए धन्यवाद-ज्ञापन से किया गया।
प्रस्तुति
प्रतीक श्री अनुराग,
संपादक--वी-विटनेस,
वाराणसी, (उ.प्र.)

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