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मंगलवार, जून 26, 2012

सामलाती प्रयासों से ही नशा मुक्ति संभव


चित्तौड़गढ़। 

‘‘नशा आज विश्व स्तरीय समस्या हो गई है, जहां अन्तर्राष्ट्रीय नशामुक्ति जैसे आयोजन पर करोड़ों रूपये खर्च करके पूरी दुनिया में जन जागरूकता फैलाई जा रही है, खासतौर पर नशे की बीमारी से ज्यादा ग्रसित इलाकों में यह आयोजन केन्द्रित किये जा रहे हैं। नशा अपने आप में एक मानसिक रोग है जिसके इर्द-गिर्द कई सारी समस्याएँ खुद ही पैदा हो जाती है। इनका इलाज दमन करने के बजाय नशा खोरी के आदी आदमी-औरत के किसी मानसिक रोग चिकित्सक इलाज द्वारा ही संभव है।’’ 

उक्त विचार सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक मनोज शर्मा ने चन्देरिया स्थित श्री सांवलियाजी बहुउद्देशीय विकलांग विद्यालय में आयोजित गोष्ठी के दौरान व्यक्त किये। आस पास के लगभग 50 प्रतिभागियों के बीच आपसी चर्चा के साथ-साथ कई आमंत्रित वक्ताओं के उद्बोधन से मंगलवार शाम साढ़े चार बजे हुई इस गोष्ठी में कई सारी बातें सुत्र रूप में निकली। मुख्य वक्ता चिकित्सक डॉ. राकेश भटनागर ने नशे के आदतन व्यक्ति की सभी स्थितियों के बारे में तथ्यात्मक जानकारियां दी तथा बताया कि यह कोई लाईलाज बीमारी नहीं है। आस पास के जिलों में नशा मुक्ति केन्द्रों और समुचित हिदायतों के साथ नशे की आदत को दूर किया जा सकता है। इस अवसर पर महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रो. निर्मल देसाई ने समाज के निचले तबके में व्याप्त नशाखोरी का बारीक विश्लेषण कर अपने अनुभवों से साफ-साफ रूप में रखा। रेडियो उद्घोषक माणिक ने समाज के हर तबके में व्याप्त इस बीमारी के आंकड़े दिए बगैर पुरा खाका सामने रखा। खासकर आज की युवा पीढ़ी जो नशे को फैशन के रूप में अपनाने में लगी है को केन्द्रित करके इसकी जिम्मेदारी परिवारों में कम होती संस्कारों की शिक्षा को जिम्मेदार ठहराया है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के उपाध्यक्ष हरिश पुरोहित ने की जबकि कार्यक्रम का संचालन संस्था प्रधान ओमप्रकाश जोशी ने किया। गोष्ठी के अंतिम हिस्से में अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती नर्बदा भांबी ने अपने दक्षिणी अफ्रीका यात्रा के संस्मरण को आधार बनाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं में बढ़ रही शराब खोरी और राष्ट्रीय स्तर पर शराब खोरी से परेशान स्त्री के बारे में खुलकर उद्बोधन दिया। संस्थान से जुड़े बी.एल. शर्मा, अध्यक्ष पुरूषोत्तम वैष्णव, सचिव मंजीतसिंह गरेवाल ने भी अपने विचार रखे। निष्कर्ष रूप में यही बाते सामने आई कि पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक चित्तौड़गढ़ नशा खोरी में लगभग पहले स्थान पर है जिसके लिए समुचित प्रयास किये जाने की जरूरत है। खासकर कक्षा 11, 12 के बाद और कॉलेज के शुरूआती दिनों में युवा पीढ़ी इसका शिकार हो रही है इस बात पर कुछ ओर जरूरी प्रयास किये जाने चाहिये। सरकार द्वारा आम आदमी को दी जाने वाली जरूरी सुविधाओं में नशा खोरी का आदी पाये जाने पर सुविधाओं में कमी करना भी एक उपाय हो सकता है। कार्यक्रम में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ज्यादा था जो कई सारी बातों को इंगित करता है। 


(ओमप्रकाश जोशी)संस्था प्रधान

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