जनसत्याग्रह 2012 @ गांव बचेगा तो देश बचेगा - Apni Maati: News Portal

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

शनिवार, मई 19, 2012

जनसत्याग्रह 2012 @ गांव बचेगा तो देश बचेगा


शोषण से मुक्ति की लड़ाई है जनसत्याग्रहःराजगोपाल
                    
कटनी @18 मई,2012
जनसत्याग्रह 2012 अन्याय तथा शोषण से मुक्ति की लडाई है। इसके खिलाफ सबको एकजुट होना होगा। संघर्ष कर जीनेवाले का संगठन तैयार करना होगा, तभी सरकार झुकेगी। यह बात जनसत्याग्रह के नायक पी.व्ही राजगोपाल ने बहोरीबंद मे आयोजित महिला सम्मेलन को संबेाधित करते हुए कही। 
     
उन्होंने कहा कि जनसंगठन से मजबूती से अफसरशाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा। महाराष्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जनसंगठन के आगे वहॉ के अफसरों को झुकना पड़ा और समस्याओं का निराकरण करना पडा़।उन्होंने कहा कि कई जगह अधिकारी न्याय देने की भूमिका में है। पुलिस को भी न्याय देने की भूमिका में आना चाहिये। जनादेश 2007 की चर्चा करते उन्होंने कहा कि जब 25000 लोग ग्वालियर से दिल्ली पहुंचे थे तो सरकार झुकी। मांगे मानने का न सिर्फ वायदा किया, बल्कि वनअधिकार कानून लागू किया गया। 

पहले बात थी आदिवासियों को 1980 तक के कब्जाबालों को जमीन मिलेगा, लेकिन उस संघर्ष का नतीजा यह हुआ कि सरकार 2005 तक वालों को जमीन का पट्टा देने को तैयार हो गयी। अभी भी  अनेक लोग भूमि के अधिकार से वंचित हैं। जनसत्याग्रह आंदोलन दवंगो के कब्जे से जमीन मुक्त कराने, सभी को आवासीय पट्टा देने और बड़े कम्पनियों को जमीन देने की बजाय गरीबो को पेट भरने के लिये जमीन देने को लेकर है। एक लाख लोग ग्वालियर से दिल्ली कूच करेंगे और सरकार को जनता की ताकत बतायेंगे।  एकता परिषद के राष्ट््रीय सयोजक रण सिंह परमार ने  कहा कि आधी आवादी घरों में रहती है। यदि वे घर से बाहर निकलकर हक की बात करे तो कोई ताकत नहीं है कि उनकी समस्याओं का निपटारा कर सके। वहीं एकता परिषद की महिला नेत्री जिम ने महिलाओं को भरोषा दिलाया कि संघर्ष के हर कदम पर साथ हैं।

        आरंभ में एकता परिषद के प्रदेश समन्वयक संतोष सिंह ने लोगों को जनसत्याग्रह आंदोलन को मकसद को बताया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए जहां कस्तुरी पटेल ने लिंगानुपात के असंतुलन पर चिंता जतायी तो सुंदरी बहन ने सरकारी दावो की पोल खोलते हुए कहा कि  तहसीलदार तथा पटवारी बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करता है। भूमि की समस्या दिन प्रतिदिन जटिल होती जा रही है। महिलाओं से कहा कि कंपनी से सचेत रहें। सम्मेलन में सीता वाई, सफल दाई, मुन्नी बहन और गोमती वहन ने संघर्ष के अनुभवों को रखा। वहीं शंकर महतो ने बहोरीबंद में सब छले हुए लोग हैं। पट्टा तो मिला है लेकिन उस पर दबंगों का कब्जा है। महिला शक्ति एकजुट हो जाये तो समाज की सूरत बदल सकती है। उन्होने कहा कि आंतक लोगों मे पैदा कर लोगो को भूमि से वेदखल किया जा रहा है।साधना बहन ने संघर्ष के गीत को प्रस्तुत किया।

        यात्रा के क्रम में ग्राम पंचायत मोहला में राजगोपाल जी का अभिनंदन किया गया। स्थानीय लोगो को सबोधित करते हुए श्री राजगोपाल ने कहा कि भूमंडलीकरण और वैश्वीकरण को लेकर काफी बदलाव हुए हैं। गांवो का अस्तित्व खत्म हो रहा है। पूंजीवालो ने जमीन की कीमत बढ़ दी है और खेत की जमीन पर कम्पनियां कब्जा कर रही है। इसका प्रतिरोध ग्राम सभा द्वारा करना है। गांव बचेगा तो देश बचेगा । 


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
कुमार कृष्णन
मीडिया इन्चार्ज@जन संवाद यात्रा, 
एकता परिषद
स्वतंत्र पत्रकार
 द्वारा श्री आनंद, 
सहायक निदेशक,
 सूचना एवं जनसंपर्क विभाग झारखंड
 सूचना भवन ,
 मेयर्स रोड, रांची
kkrishnanang@gmail.com 
मो - 09304706646

SocialTwist Tell-a-Friend

कोई टिप्पणी नहीं:

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

पेज