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गुरुवार, अप्रैल 19, 2012

जातियां, गैर-बराबरी समाप्‍त कर संपत्‍ति में समान अधिकार होना आवश्‍यक है।


वर्धा 

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में गुरूवार को हबीब तनवीर सभागार में संचार एवं मीडिया अध्‍ययन केंद्र के तत्‍वावधान में ‘व्‍यवस्‍था परिवर्तन और हमारा संविधान’ विषय पर वरिष्‍ठ पत्रकार तथा प्रथम प्रवक्‍ता के संपादक राम बहादुर राय ने विशेष व्‍याख्‍यान दिया। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने की। राम बहादुर राय ने अपने वक्‍तव्‍य की शुरूआत जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से की। व्‍यवस्‍था परिवर्तन को लेकर चल रही बहस पर उन्‍होंने अपनी बेबाक राय रखी। उन्‍होंने राष्‍ट्र-राज्य और संस्‍थाओं के बीच के संबंधों को विस्‍तार से व्‍याख्‍यायित किया तथा संविधान सभा और संविधान निर्माण के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य पर भी चर्चा की।
      अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि व्‍यवस्‍था परिवर्तन के लिए जातियां, गैर-बराबरी समाप्‍त कर संपत्‍ति में समान अधिकार होना आवश्‍यक है। उन्‍होंने संविधान को तत्‍कालीन परिस्थिति में बना बेहतरीन डाक्‍युमेंट की संज्ञा देते हुए कहा कि न्‍याय, बंधुता और समानता की बात हमारे संविधान में की गयी है जिससे आज की व्‍यवस्‍था में परिवर्तन संभव हो पाया है। इस अवसर पर मीडियाविद प्रो. रामशरण जोशी ने भी अपने विचार प्रकट किये।

कार्यक्रम का संचालन संचार एवं मीडिया अध्‍ययन केंद्र के निदेशक प्रो. अनिल के. राय ‘अंकित’ ने किया तथा आभार ज्ञापन विश्‍वविद्यालय के कोलकाता केंद्र के प्रभारी डॉ. कृपाशंकर चौबे ने प्रस्‍तुत किया। व्‍याख्‍यान के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपनी जिज्ञासाएं भी प्रकट की। इस अवसर पर बड़ी संख्‍या में अध्‍यापक, शोधार्थी तथा छा-छात्राएं उपस्थित थे। 

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