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रविवार, अक्तूबर 09, 2011

रंग जमने लगा मीरा महोत्सव का


चित्तौड़गढ़.
नौ अक्टूबर.दक्षिणी राजस्थान के प्रमुख सांस्कृतिक और साहित्यिक समारोह मीरा महोत्सव के इस सालाना आयोजन में दूजे दिन से ही रंग जमने लगा है.संस्थान के सचिव प्रो.सत्यनारायण समदानी और अध्यक्ष भंवर लाल सिसोदिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार नौ अक्टूबर को दोपहर बाद सांवलिया विश्रान्ती गृह में जिरो से लेकर तेरह की उम्र तक के बच्चों ने भान्त-भान्त के रूप धर कर आनंदित दर्शकों को अपने अभिनय से कर दिया.यहाँ आयोजित हुई मीरा-कृष्ण बनो प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बहुत से रूपों में अपने मेकअप के ज़रिए इस महोत्सव से अपने जुड़ाव को स्पस्ट किया. इस अवसर पर माहौल बड़ा भक्तिमय और रोमांचित कर देने बन पडा.. हालाकि सभागार में ज्यादातर अभिभावक ही मौजूद थे मगर,उनका उत्साह भी इस वार्षिक के आयोजन को आगे बढाने में बेहद ज़रूरी नज़र आया.

प्रतियोगिता के संयोजक और सह-सचिव जे.पी.भटनागर ने के अनुसार निर्णायक संजय गुप्ता,मोनिका सिंह और श्रीमती सतीश शर्मा ने उम्र के अनुसार दो वर्गों में बंटी इस प्रतिस्पर्धा में निष्पक्ष निर्णय दिए.जिरो से छ साल के जूनियर वर्ग में दिव्यांश कलंत्री,मेहल लड्ढा,वृषाली वैष्णव  और छ से तेरह साल के सीनियर वर्ग में प्रियांशी काबरा,निधि पुंगलिया और आरुशी मूंदड़ा  ने क्रमश: पहला,दूजा और तीसरा स्थान प्राप्त किया.इस दोपहरकालीन समारोह में मुख्य अथिति  श्रीमती सोनल जैन,विशिष्ट अथिति डॉ. फातिमी हुसैन,अध्यक्ष मंजू धाकड़ मौजूद थी.

संस्थान के दूजे सह-सचिव डॉ. ए.एल.जैन के अनुसार दस से बारह अक्टूबर तक नगर में नानी बाई के मायरे की कथा के जनप्रचार हेतु के प्रभातफेरियों का आयोजन भी किया रहा है,जिनमें दस को सुबह छ बजे प्रताप नगर के लक्ष्मीनाथ मंदिर से कुम्भानगर तक,ग्यारह को दुर्ग चित्तौड़ में और आखिर में तेरह को रुबह रामकुडी से शहर तक निकाली जाएगी.कोई भी शहरवासी इनमें प्रतिभागिता निभा सकती हैं.सचिव समदानी के अनुसार महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण और आयोजन का औपचारिक उदघाटन दस अक्टूबर को ही रात सात बजे नगर के गौरा बादल स्टेडियम में बालव्यास राधाकृष्ण जी महाराज की संगीतमय कथा से होगा.

माणिक
संस्थान सदस्य 

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