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मंगलवार, अक्तूबर 22, 2013

''दुष्यंत की कहानियां बिल्कुल नए जमाने की सच्चाइयों का संधान करती हैं''-रामेश्वर राय

हिन्दू कालेज में रचना पाठ

दिल्ली।  
दुष्यंत की कहानियां बिल्कुल नए जमाने की सच्चाइयों का संधान करती हैं और इसके लिए वे किसी भी पारम्परिक शिल्प को जस का तस स्वीकार नहीं करते।  हिन्दू कालेज की हिन्दी साहित्य सभा द्वारा आयोजित 'रचना पाठ और लेखक से मिलिए' कार्यक्रम में युवा कथाकार दुष्यंत के पहले कहानी संग्रह 'जुलाई की एक रात' पर परिसंवाद में आलोचक रामेश्वर राय ने कहा कि दुष्यंत अपनी कहानियों में जिन जीवन स्थितियों की चर्चा करते हैं वे हमें स्वीकार न होने पर भी उन पर बात करना जरूरी है।  डॉ राय ने कहा कि उत्तर आधुनिकता ने हमारे मूल्यों को छिन्न किया है और दुष्यंत की रचनाशीलता इन स्थितियों के चित्रण में प्रकट हुई है। 

हिन्दी साहित्य सभा के परामर्शदाता पल्लव ने कहा कि शिल्प की दृष्टि से ये कहानियां चौंकाने वाली हैं क्योंकि छोटे कलेवर में किसी घटना या स्थिति का वर्णन संक्षेप में किया गया है। उन्होंने कहा कि इन कहानियों में भारतीय युवा के समक्ष आ रहे नए संघर्षों का सुन्दर चित्रण आया है वहीं प्रेम और स्त्री पुरुष संबंधों की पारंपरिक अवधारणाओं के विपरीत यहाँ नयी सच्चाइयाँ देखी जा सकती हैं। पल्लव ने जिस एक और पक्ष की तरफ ध्यान दिलाया वह यह था कि दुष्यंत ने राजस्थान के उन क्षेत्रों और उन लोगों को भी अपनी कहानियों में स्थान दिया है जो तथाकथित मुख्यधारा से बाहर हैं।  कवि और 'धरती' के सम्पादक शैलेन्द्र चौहान ने कहा कि इधर के युवा रचनाकारों में विचारधारा की कमी से ऐसी रचनाएं आ रही हैं जिन्हें परिपक्व नहीं कहा जा सकता। उन्होंने दुष्यंत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी कहानियों में नए जीवन प्रसंगों और संघर्षों को स्थान देंगे।    
आयोजन में दुष्यंत ने अपने कहानी संग्रह 'जुलाई की एक रात' से कुछ कहानियों और कहानी अंशों का पाठ किया।  उन्होंने यहाँ 'हीरियो उर्फ़ हीरा है सदा के लिए', 'ताला,चाबी,दरवाज़ा और संदूक'  तथा 'प्रेम का देह्गीत' का पाठ किया। बाद में युवा श्रोताओं से मुखातिब होते हुए उन्होंने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताया।  उन्होंने कहा कि वे आदर्शीकृत स्थितियों का गुणगान करने में विशवास नहीं रखते अपितु अपने समय और जीवन को सही सही देखना-समझना ही उनका रचनात्मक लक्ष्य है।

अध्यक्षता कर रहीं विभाग की वरिष्ठ आचार्य डॉ विजया सती ने कहा कि उन्हें दुष्यंत की कहानियां पसंद आई हैं क्योंकि दुष्यंत अत्यंत सहज ढंग से अपनी रचना का निर्माण करते हैं।  पेंगुइन बुक्स के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी भी पर्याप्त आकर्षण का केंद्र रही। अंत में विभाग की तरफ से डॉ अरविन्द संबल ने दुष्यंत को शाल भेंटकर अभिनन्दन किया।  संयोजन पूर्णिमा वत्स ने किया तथा हिन्दी साहित्य सभा के संयोजक श्वेतांशु शेखर ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में डॉ रचना सिंह, डॉ हरीन्द्र कुमार, डॉ अभय रंजन, डॉ रविरंजन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।  

श्वेतांशु शेखर
संयोजक
हिन्दी साहित्य सभा

हिन्दू कालेज, दिल्ली

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