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बुधवार, अक्तूबर 03, 2012

''पत्रिका ‘संबोधन’ एक व्यक्ति की जिद और जुनून का नतीजा है। ''- हरिनारायण

  • कमर की कहानियों में लगातार छले जा रहे आदमी का संघर्ष: हरिनारायण
  • कांकरोली के कमर मेवाड़ी को डॉ घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार
  • पद्मजा शर्मा, दुष्यंत, डॉ घासीराम, राजेंद्र कसवां, शेख अब्दुल हमीद ने की समारोह में शिरकत


चूरू, 2 अक्टूबर। 

प्रयास संस्थान की ओर से हर वर्ष दिया जाने वाला प्रतिष्ठित डॉ घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार वर्ष 2012 के लिए कांकरोली के प्रख्यात कथाकार कमर मेवाड़ी को उनकी पुस्तक ‘जिजीविषा और अन्य कहानियां’ के लिए दिया गया है। मंगलवार को यहां सूचना केंद्र में आयोजित समारोह में उन्हें पुरस्कार स्वरूप मानपत्रा, शॉल, श्रीफल एवं पांच हजार एक सौ रुपए का चैक प्रदान किया गया। 

समारोह के मुख्य अतिथि एवं प्रख्यात हिंदी साहित्यिक पत्रिका ‘कथादेश’ के संपादक हरिनारायण ने कहा कि कमर मेवाड़ी की कहानियों में हर उस आदमी का संघर्ष है, जो लगातार छला जा रहा है। उनकी कहानियों के पात्र हमारे आसपास के पात्र हैं, अक्सर जिनकी अनदेखी हम करते हैं और जो संघर्ष करते हुए जीते हैं, मगर हारते नहीं। उन्होंने कहा कि कमर मेवाड़ी द्वारा पिछले छियालीस वर्ष से प्रकाशित पत्रिका ‘संबोधन’ एक व्यक्ति की जिद और जुनून का नतीजा है। 

मुख्य वक्ता डॉ दुष्यंत ने कहा कि शब्द के सामने हर युग में चुनौतियों रही हैं, लेकिन वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हर चीज को बाजार में तब्दील किया जा रहा है। यह एक बड़ी साजिश है, जिसे समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किताबों के बिकने महज से लेखन की गुणवत्ता प्रमाणित नहीं होती है। किसी भी लेखन की कसौटी यह है कि उससे लोगों की जिंदगी में कितनी तब्दीली आती है और उन शब्दों की गूंज कितने दिनों तक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बाजार ने राजस्थानी को हमसे छीनने का प्रयास किया है लेकिन राजस्थानी हमारे पेट की नहीं, हमारे जमीर और भावनाओं की भाषा है, इसलिए राजस्थानी भाषा हमेशा बनी रहेगी। 

विशिष्ट अतिथि जोधपुर की वरिष्ठ साहित्यकार पद्मजा शर्मा ने कहा कि साहित्य व्यक्ति को बेहतर मनुष्य बनाता है और केवल साहित्य ही ऐसा कर सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल साहित्य ही है, जहां पीड़ित, शोषित और वंचित की चीख सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि जो रचना अपने समय से विमुख होती है, समय उससे विमुख हो जाता है। साहित्य ऐसा होना चाहिए जो सच के आगे-पीछे की सचाइयों का पता पाठक को दे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रचनाकार को स्वयं से यह सवाल करना चाहिए कि क्या उसका साहित्य उस व्यक्ति तक पहंुच रहा है, जिसके लिए वह लिखा जा रहा है। शर्मा ने प्रेमचंद को उद्धृत करते हुए कहा कि साहित्य राजनीति के सामने जलने वाली मशाल है  और वह क्रांति के लिए एक जमीन तैयार करता है। 
सम्मानित साहित्यकार कमर मेवाड़ी ने अपने वक्तव्य में कहा कि मैं एक बहुत ही मामूली आदमी हूं और मैंने आज तक ऐसा कुछ नहीं लिखा, जिस पर गर्व किया जा सके। बस मेरे भीतर एक बेचैनी है जो मुझे लिखने के लिए बाध्य करती है। उन्होंने कहा कि कहानी के लिए मैं काल्पनिक पात्रों का सृजन नहीं करता और मेरी सारी कहानियां यथार्थ के धरातल पर खड़ी हैं। 

इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर प्रयास संस्थान की ओर से प्रकाशित एवं कुमार अजय द्वारा संपादित स्मारिका का भी विमोचन किया गया तथा प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ घासीराम वर्मा का भी सम्मान किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार भंवर सिंह सामौर ने स्वागत उद्बोधन में अतिथियों का परिचय दिया। राजेंद्र शर्मा ‘मुसाफिर’ ने आभार जताया। संचालन कमल शर्मा ने किया। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण, वरिष्ठ साहित्यकार बैजनाथ पंवार, पूर्व सभापति रामगोपाल बहड़, सोहन सिंह दुलार, हनुमान कोठारी, कर्नल जसवंत खां, रियाजत खान, जमील चौहान, डॉ कृष्णा जाखड़, गीता सामौर, चंद्रशेखर पारीक, उम्मेद धानियां, डॉ अमर सिंह शेखावत, भंवर लाल महरिया, माधव शर्मा पत्राकार, शिवकुमार शर्मा मधुप, डॉ रामकुमार घोटड़, बनवारी खामोश ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किय इस मौके पर मेवाड़ के प्रख्यात गजलकार शेख अब्दुल हमीर, डॉ जगजीत कविया, वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र कसवा, बीरबल नोखवाल, सुधींद्र शर्मा सुधी, उम्मेद गोठवाल, परमेश्वर जालुका, इंदिरा सिंह, मानसिंह सामौर, जसवंत सिंह मेड़तिया, गिरधारी सैनी, रामचंद्र मेघवाल, विश्वनाथ भाटी, डॉ रामकुमार घोटड़, किशोर निर्वाण, मंगल व्यास भारती सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी मौजूद थे। 

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