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रविवार, अगस्त 26, 2012

''युवा लेखकों को अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी के सृजन से प्रेरणा लेते हुए कालजयी साहित्य की रचना करनी चाहिए। ''-सुनील गंगोपाध्याय


By रमेश सर्राफ 
झुंझुनू,राजस्थान

झुंझुनू।
 भारत सरकार की साहित्य अकादेमी की ओर से हाल ही में विभिन्न भारतीय भाषाओं के लिए शुरू किए गए युवा पुरस्कारों के तहत राजस्थानी भाषा का पहला युवा पुरस्कार शनिवार शाम को भुवनेश्वर में हुए समारोह में भाड़ंग (चूरू) के साहित्यकार दुलाराम सहारण को प्रदान किया गया।

अकादेमी अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय ने दुलाराम सहारण को उत्कीर्ण ताम्रफलक एवं पचास हजार रुपए का चैक प्रदान कर पुरस्कृत किया। दुलाराम को यह पुरस्कार उनके प्रथम कहानी संग्रह ‘पीड़’के लिए दिया गया है। इस मौके पर अकादेमी अध्यक्ष गंगोपाध्याय ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि राजस्थानी सहित सभी भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य का सृजन हो रहा है और सभी भाषाएं भारतीय साहित्य को समृद्धि में जबरदस्त योगदान कर रही हैं। अकादेमी ने इन सभी भाषाओं के युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से युवा पुरस्कारों की शुरुआत की है। हर्ष का विषय है कि सभी भारतीय भाषाओं के लिए सशक्त रचनाकारों को युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। इन युवा लेखकों को अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी के सृजन से प्रेरणा लेते हुए कालजयी साहित्य की रचना करनी चाहिए।

गंगोपाध्याय की अध्यक्षता में हुए समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार पद्मभूषण रमाकांत रथ ने कहा कि युवा लेखकों को समय सीमा में नहीं बंधकर सार्वकालिक रचनाओं का सृजन करना चाहिए। अकादेमी के उपाध्यक्ष व प्रख्यात विद्वान विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने इस मौके पर युवा लेखकों से कहा कि युवाओं को अपनी असीम ऊर्जा और प्रतिभा से सशक्त लेखन कर युग की धारा को बदल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य एवं प्रेम ने इस दुनिया के फलक को चौड़ा किया है। संचालन अकादेमी के उप सचिव केएस राव ने किया। समारोह में राजस्थानी भाषा परामर्शदात्री समिति के संयोजक एवं राजस्थान के ख्यातनाम साहित्यकार डॉ चंद्रप्रकाश देवल, साहित्यकार कमल रंगा एवं उम्मेद गोठवाल भी मौजूद थे।

शनिवार को आयोजित समारोह में दुलाराम सहारण के अलावा असमिया के अरिंदम बरकटकी, बांग्ला के विनोद घोषाल, बोडो की जयश्री बर, अंग्रेजी के विक्रम संपत, गुजराती के ध्वनिल पारेख, हिंदी के उमाशंकर चौधरी, कन्नड़ के वीरण्ण मडिवाळर, कश्मीरी के निसार आज़म, कोंकणी की जोफा गोंसाल्विस, मैथिली के आनंद कुमार झा, मलयाळम के सुष्मेश चंद्रोथ, मणिपुरी के देवचंद, मराठी के ऐश्वर्य पाटेकर, नेपाली के कमल रेग्मी, ओडिय़ा की गायत्रीबाला पंडा, पंजाबी के परमवीर सिंह, संस्कृत के परमानंद झा, संताली के सतीलाल मुर्मू, तमिल के एम. तवसी, तेलुगू के वेमपल्ली गंगाधर, उर्दू के विशाल खुल्लर को युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय है कि चूरू जिले की तारानगर तहसील के गांव भाड़ंग में 15 सितंबर 1976 को मां जहरोदेवी व पिता मनफूलराम के घर जन्मे दुलाराम सहारण इससे पूर्व भत्तमाल जोशी साहित्य पुरस्कार 1997, ज्ञान फाउंडेशन सम्मान एवं बसंती देवी धानुका युवा साहित्यकार पुरस्कार 2009 से सम्मानित हो चुके हैं। ‘पीड़’ के अलावा राजस्थानी बाल उपन्यास ‘जंगळ दरबार’, राजस्थानी बाल कथा संग्रह ‘क्रिकेट रो कोड’, हिंदी बालकथा संग्रह ‘चांदी की चमक’ आदि उनकी पुस्तकें हैं तथा राजस्थानी कथा संग्रह ‘बात न बीती’ का संपादन उन्होंने किया है। बचपन से ही साहित्य में रूचि रखने वाले दुलाराम की रचनाएं माणक, जागती जोत, राजस्थली सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। फिलहाल सहारण गैर सरकारी संगठन ‘प्रयास’ संस्थान के अध्यक्ष हैं और उन्होंने हाल ही में राजस्थानी की पहली अनुवाद पत्रिका ‘अनुसिरजण’ का संपादन-प्रकाशन शुरू किया है।

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