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मंगलवार, मई 08, 2012

अनिलप्रभा कुमार :शिल्प के प्रति भी सजग हैं और यह शिल्प की विशिष्टता उनकी कहानियों में दृष्टव्य है।


 डॉ. अनिल प्रभा कुमार की पुस्तक “बहता पानी” का विमोचन

न्यूयॉर्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में ४ मई को अनिलप्रभा कुमार के कहानी –संग्रह “बहता पानी” का विमोचन हुआ। दक्षिण- एशिया संस्थान के अन्तर्गत “कहानी- मंच” की ओर से इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध लेखिका सुषम बेदी ने की। डॉ. सुषम बेदी ने अनिल प्रभा के लेखन का परिचय देते हुए कहा कि संवेदनशीलता का प्रेषण उनके कहानी-लेखन की विशेषता है। उन्होंने कहा कि अनिलप्रभा की कहानियाँ अमरीका में रहने वाले भारतीयों के मूल्यों से जुड़ी हुई कहानियाँ हैं। उनकी कहानियों में यहाँ की रोज़मर्रा की स्थितियों को प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है। वह कहानियों में गहरे तक डूबकर उसको गहन संवेदना के साथ व्यक्त करती हैं। वह शिल्प के प्रति भी सजग हैं और यह शिल्प की विशिष्टता उनकी कहानियों में दृष्टव्य है। येल विश्वविद्यालय की सीमा खुराना ने भारत के प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार रूपसिंह चन्देल द्वारा “बहता पानी” कहानी संग्रह पर व्यक्त किए गए विचार पढ़े।
इस लेख में अनिलप्रभा कुमार की कहानियोंका बहुत गहन और सूक्ष्म विवेचन किया गया। चन्देल जी ने अनिल प्रभा की कहानियों के विषय में कहा कि वे “गहन संवेदना की सूक्ष्म अभिव्यक्ति” हैं। उन्होंने इन कहानियों में छुपे हुए रंगों को बहुत कलात्मकता के साथ उजागर किया। उनके विचार में, अनिलप्रभा कुमार की कहानियाँ ही नहीं, कविताओं की भी मौलिकता, भाषा की प्रांजलता और शिल्प वैशिष्टय अनूठा है।

न्यूयॉर्क स्थित आई.टी.वी के कार्यक्रम निर्देशक और लेखक श्री अशोक व्यास ने कहा कि अनिलप्रभा जी की कहानियाँ पढ़ना- सुनना संवेदना की सोई नदी को जगा देता है। उन्होंने इस संग्रह की कहानी “उसका इंतज़ार” की प्रशंसा करते हुए कहा कि अनिलप्रभा की शैली संवेदनशील पर संयत, भावनात्मक पर व्यावहारिक, विस्तृत आयामों वाली पर बारीक़ी से गढ़ी हुई शैली है। “उसका इंतज़ार” कहानी में नायिका का अवसाद पाठक के भीतर रुलाई बन कर फूट पड़ता है। उन्होंने संग्रह की एक और कहानी “किसलिए” के विषय में कहा कि जिस तरह इस एक छोटी सी कहानी में एक विस्तार को सहेजा गया है वह कहानी कथन में अनिलप्रभा जी के कौशल का प्रमाण है।

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