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बुधवार, फ़रवरी 22, 2012

समाज से संवाद करें वही साहित्य :रणवीरसिंह सिंह



झुंझुनू,22 फरवरी। 

साहित्य ऐसा होना चाहिए जो समाज से संवाद करे और सवाल खड़ा करे। लोक संस्कृति का मतलब नाच-गाना नहीं होता। संस्कृति का मतलब होता वहां का रहन-सहन। इस बात को लोग भूलते जा रहे हैं, यह चिंता का विषय है। यह बात मंगलवार को डूंडलोद के मां भारती टीटी कॉलेज में राजस्थानी समारोह के समापन पर अखिल भारतीय जन नाट्य संघ के अध्यक्ष रणवीरसिंह ने कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्भोदन के दौरान कही। उन्हने कहा कि संस्कृति को समझने के लिए पहले गांवों की संस्कृति को समझना होगा। 

रणवीर सिंह ने कहा कि राजस्थान की कहानियां विदेशी कहानियों से किसी भी सूरत में कम नहीं हैं। अफ्रीका की कुछ कहानियां राजस्थान की कहानियों से मिलती-जुलती हैं। किसी भी राजनीतिक पार्टी ने आज तक संस्कृति को लेकर नीति बनाने का एजेंडा अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया, जो बड़े शर्म की बात है। कुछ समय पहले मणिपुर में यह प्रयास हुआ था, लेकिन राज्य सरकार बदलने के कारण नीति नहीं बन पाई। राष्ट्रीय संस्कृति नीति बनाते समय राज्य स्तर की नीति बनानी पड़ेगी। साहित्य समाज को सुधारने का हथियार है, इसके लिए लेखक को पूरी हिम्मत के साथ लिखना होगा। राजस्थान कहानियों को मंच प्रदान करना होगा। राजस्थान में कई बोलियां बोली जाती है। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी दीपचंद पंवार ने कहा कि लोक-साहित्य के कारण लोक-संस्कृति की पहचान होती है। राजस्थानी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए साहित्य के प्रति भावना पैदा करनी होगी। राजस्थानी भाषा को बढ़ावा देने के लिए साहित्यकारों को भी आगे आना होगा। लोक भावना से ही संस्कृति व भाषा को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्राचार्य सुभाषचंद्र सैनी, टीटी कॉलेज के अध्यक्ष नीरज कुमार सैनी व संयोजक डॉ. नरपतसिंह सोढ़ा  थे। संस्था सचिव विनोद कुमार शर्मा ने आगंतुकों का स्वागत किया। श्याम जांगिड़, डॉ. महेंद्रसिंह मील व डॉ. तेजसिंह राठौड़ ने सम्मेलन के दौरान पत्र वाचन किया।

रमेश सर्राफ झुंझुंनू,राजस्थान 9414255034

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